ऋषिकेश स्थित श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर और त्रिवेणी घाट पर आयोजित गंगा उत्सव में ‘मेरा संकल्प – गंगा स्वच्छता शपथ’ दिलाई गई, दीपोत्सव और नुक्कड़ नाटक से दिया गया स्वच्छ गंगा का संदेश।
ऋषिकेश, 04 नवम्बर 2025।
पवित्र त्रिवेणी घाट ऋषिकेश पर सोमवार को गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित किए जाने की वर्षगांठ के अवसर पर गंगा उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन नमामि गंगे प्रकोष्ठ, कार्यालय कार्यक्रम निदेशक राज्य गंगा स्वच्छता मिशन नमामि गंगे उत्तराखंड, देहरादून एवं जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर पंडित ललित मोहन शर्मा श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर, ऋषिकेश के छात्र-छात्राओं ने उत्सव में सक्रिय भागीदारी की।
कार्यक्रम का शुभारंभ नमामि गंगे के नोडल अधिकारी डॉ. अशोक कुमार मेंदोला द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।
गंगा स्वच्छता शपथ और जनजागरूकता का संदेश
डॉ. मेंदोला ने उपस्थित विद्यार्थियों को “मेरा संकल्प – गंगा स्वच्छता शपथ” दिलाई और गंगा को स्वच्छ, निर्मल और प्रदूषणमुक्त बनाए रखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि —
“गंगा हमारी संस्कृति, सभ्यता और आस्था का केंद्र है। गंगा तटों को स्वच्छ रखना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।”
उन्होंने लोगों से प्लास्टिक, पॉलिथीन और सिंगल यूज़ आइटम्स का प्रयोग बंद करने का आग्रह करते हुए कूड़ा-कचरा नदी तटों पर न फेंकने का संदेश दिया।
दीपोत्सव, सांस्कृतिक कार्यक्रम और नुक्कड़ नाटक ने बढ़ाई शोभा
गंगा उत्सव के अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा आयोजित महागंगा आरती, दीपदान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, नुक्कड़ नाटक, गंगा स्वच्छता शपथ और जनजागरूकता रैली ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
नुक्कड़ नाटक में छात्र-छात्राओं ने गंगा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा का सशक्त संदेश प्रस्तुत किया।
उपस्थित प्रतिभागी और सामाजिक कार्यकर्ता
कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता भागवताचार्य अरुण व्यास, हिमांशु कुमार, तथा विश्वविद्यालय परिसर के छात्र-छात्राएँ —
सिमरन गुप्ता, पायल जोशी, पूजा, प्रियंका, सानिया देवरानी, अंकिता, शिवानी भारती, भारती रावत, हर्षिता पयाल, अभिषेक राजभर, सुजल पाल, इशांत पाल, प्रेम लोधी, दीपक, सोनिया शर्मा — सहित स्थानीय नागरिकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
सभी ने मिलकर गंगा की स्वच्छता, संरक्षण और पर्यावरण संतुलन हेतु सामूहिक संकल्प लिया।
आध्यात्मिकता और पर्यावरण का संगम
गंगा उत्सव का यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने जनमानस में गंगा संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण जागरूकता को भी नई दिशा दी।
दीपदान और आरती की अलौकिक छटा ने त्रिवेणी घाट को एक पावन ऊर्जा से भर दिया।

