ऑपरेशन RAGEPILL’ के बाद उत्तराखंड में एफडीए अलर्ट मोड पर
🚨 देशभर में चर्चा बने ‘ऑपरेशन RAGEPILL’ के बाद उत्तराखंड में भी बढ़ी सतर्कता, सहसपुर की कथित यूनिट पर लाइसेंस और वैध अनुमति को लेकर उठे गंभीर सवाल; खाद्य एवं औषधि विभाग ने अवैध इकाइयों पर कड़ी कार्रवाई के दिए संकेत।
Dehradun, 18 मई, SKS News! देशभर में चर्चा में आए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के बड़े अभियान “ऑपरेशन RAGEPILL” के बाद उत्तराखंड का खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) भी पूरी तरह सतर्क हो गया है। अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के खिलाफ हुई इस कार्रवाई में लगभग 182 करोड़ रुपये कीमत की प्रतिबंधित सिंथेटिक ड्रग “कैप्टागन” बरामद की गई है। मामले में एक विदेशी नागरिक सहित दो लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है।
मीडिया रिपोर्ट्स में देहरादून जनपद के सहसपुर क्षेत्र स्थित “ग्रीन हर्बल्स” नामक इकाई का नाम सामने आने के बाद FDA ने स्पष्ट किया है कि उक्त यूनिट विभाग के रिकॉर्ड में पंजीकृत नहीं थी। विभाग के अनुसार न तो इस संस्थान को औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम के अंतर्गत कोई निर्माण लाइसेंस जारी किया गया था और न ही FSSAI के तहत किसी प्रकार की अनुमति दी गई थी।
🔍 क्या है कैप्टागन?
कैप्टागन एक सिंथेटिक साइकोट्रॉपिक ड्रग है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फेनेथाइलीन आधारित उत्तेजक पदार्थ माना जाता है। पश्चिम एशिया के कई संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में आतंकी संगठनों और ड्रग नेटवर्क द्वारा इसके उपयोग के कारण इसे “जिहादी ड्रग” भी कहा जाता है। यह लंबे समय तक जागे रहने, भय कम करने और शरीर को अत्यधिक सक्रिय बनाए रखने के लिए कुख्यात रही है।
⚠️ एफडीए ने दी स्थिति स्पष्ट
FDA ने कहा कि कैप्टागन किसी वैध औषधि की श्रेणी में नहीं आती और इसका नियमन विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। यह NDPS एक्ट के तहत प्रतिबंधित एवं कंट्रोल्ड सब्सटेंस की श्रेणी में आती है। विभाग ने यह भी कहा कि प्रदेश में बिना अनुमति संचालित निर्माण इकाइयों और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
📌 उत्तराखंड कनेक्शन की जांच तेज
एनसीबी की शुरुआती जांच में मामला अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट से जुड़ा बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार बरामद खेप को पश्चिम एशिया भेजने की तैयारी थी। केंद्रीय एजेंसियां अब सहसपुर स्थित कथित यूनिट के संचालन और इसके पीछे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच में जुटी हैं।
🚔 अवैध इकाइयों पर बढ़ेगी सख्ती
मामले के बाद प्रदेश में बिना लाइसेंस संचालित इकाइयों और अवैध निर्माण प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई तेज होने के संकेत मिले हैं। FDA ने साफ कहा है कि वैधानिक अनुमति के बिना संचालित इकाइयों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
🗣️ अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी का बयान
अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि “ग्रीन हर्बल्स” नामक इकाई विभाग के रिकॉर्ड में पंजीकृत नहीं है। इसे न तो औषधि निर्माण का लाइसेंस दिया गया था और न ही FSSAI की अनुमति। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैप्टागन जैसी प्रतिबंधित सामग्री NDPS एक्ट के अंतर्गत आती है और विभाग प्रदेश में बिना लाइसेंस संचालित इकाइयों के खिलाफ लगातार अभियान चला रहा है।
