दुंगली ग्राम पंचायत ने लिया नशामुक्ति का संकल्प, शराब पर पूर्ण प्रतिबंध और 21 हजार तक जुर्माने का फैसला
ग्राम समाज सुधार समिति का गठन, ‘शराब नहीं, संस्कार’ मुहिम को मिला नया बल
चम्बा/टिहरी, 13 जून | SKS News
उत्तराखंड के पर्वतीय गांवों में सामाजिक जागरूकता और जनभागीदारी की एक नई मिसाल पेश करते हुए ग्राम पंचायत दुंगली ने नशामुक्त समाज निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाया है। ग्राम पंचायत में आयोजित एक विशेष ग्राम सभा बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से गांव को पूर्णतः नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया। बैठक की अध्यक्षता ग्राम प्रधान संगीता डबराल ने की, जिसमें ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, ग्राम समाज सुधार समिति के पदाधिकारियों एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
बैठक में ग्रामवासियों ने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध एकजुटता दिखाते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। ग्राम सभा ने तय किया कि ग्राम पंचायत क्षेत्र में आयोजित होने वाले विवाह समारोहों, जन्मोत्सवों तथा अन्य सामाजिक आयोजनों में शराब का प्रयोग पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। इसके अतिरिक्त किसी भी कार्यक्रम में डीजे केवल रात्रि 12 बजे तक ही संचालित किया जा सकेगा।
नियम उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई
ग्राम सभा में यह भी निर्णय लिया गया कि सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीकर अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज अथवा हुड़दंग करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। ग्रामवासियों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए ऐसे मामलों में 21 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाए जाने का निर्णय लिया।
ग्रामीणों का मानना है कि सामाजिक अनुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए ऐसे ठोस कदम समय की आवश्यकता हैं। यह निर्णय गांव में बढ़ती सामाजिक जागरूकता और सामूहिक उत्तरदायित्व का परिचायक माना जा रहा है।
ग्राम समाज सुधार समिति का गठन
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने सामाजिक सुधार एवं जनजागरण को गति देने के उद्देश्य से ग्राम समाज सुधार समिति का गठन भी किया।
समिति में—
संरक्षक:
– संगीता डबराल (ग्राम प्रधान)
– गीता डबराल (जिला पंचायत सदस्य)
पदाधिकारी:
– विनोद बेलवाल – अध्यक्ष
– सुनीता बेलवाल – उपाध्यक्ष
– ममता बेलवाल – सचिव
– ऊषा देवी – सह सचिव
– प्रदीप डबराल – कोषाध्यक्ष
सदस्य:
राजेश्वरी देवी, प्रमिला देवी, उर्मिला देवी, रेखणी देवी, सुषमा देवी, विकास डबराल, अमनदीप बेलवाल, शैला डबराल सहित अन्य ग्रामीणों को समिति में शामिल किया गया।
पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा है यह पहल : गीता डबराल
जिला पंचायत सदस्य गीता डबराल (सौड़) ने ग्राम सभा को संबोधित करते हुए कहा कि नशा समाज और परिवार दोनों को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत दुंगली द्वारा लिया गया यह निर्णय पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखकर शिक्षा, खेल एवं रोजगार की दिशा में प्रेरित करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि समाज स्वयं जागरूक होकर पहल करे तो सकारात्मक परिवर्तन निश्चित रूप से संभव है।
स्वस्थ और संस्कारित समाज का निर्माण हमारा लक्ष्य : संगीता डबराल
ग्राम प्रधान संगीता डबराल ने कहा कि ग्राम पंचायत का उद्देश्य केवल शराबबंदी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ, जागरूक और संस्कारित समाज का निर्माण करना है।
उन्होंने सभी ग्रामीणों से ग्राम सभा द्वारा लिए गए निर्णयों का पूर्ण पालन करने तथा गांव को आदर्श नशामुक्त ग्राम बनाने में सक्रिय सहयोग देने का आह्वान किया।
नशामुक्ति एक सामाजिक जनआंदोलन : सुशील बहुगुणा
“शराब नहीं, संस्कार” मुहिम के प्रणेता सुशील बहुगुणा ने ग्राम पंचायत दुंगली की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि नशामुक्ति केवल सरकारी अभियान नहीं बल्कि एक सामाजिक जनआंदोलन है।
उन्होंने कहा कि जब गांव स्वयं संकल्प लेकर आगे बढ़ते हैं तो परिवर्तन अधिक स्थायी और प्रभावी होता है। उन्होंने जानकारी दी कि उत्तराखंड के सैकड़ों गांव इस अभियान से जुड़ चुके हैं और दुंगली ग्राम पंचायत का यह निर्णय अन्य पंचायतों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
सामाजिक सुधार के लिए निरंतर कार्य करेगी समिति
ग्राम समाज सुधार समिति के अध्यक्ष विनोद बेलवाल ने कहा कि सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध सामूहिक जागरूकता ही सबसे प्रभावी हथियार है।
उन्होंने कहा कि समिति ग्राम पंचायत के साथ मिलकर नशामुक्ति अभियान, महिला सशक्तिकरण, युवा जागरूकता, सामाजिक सुधार तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करेगी।
“शराब नहीं, संस्कार” का सामूहिक संकल्प
बैठक के अंत में सभी ग्रामीणों ने नशामुक्त, संस्कारित एवं आदर्श ग्राम निर्माण के लिए सामूहिक शपथ ली। ग्रामीणों ने ग्राम सभा के निर्णयों का पूर्ण पालन करने का आश्वासन देते हुए एक स्वर में कह
“शराब नहीं, संस्कार ही हमारी पहचान बनेगा।”
दुंगली ग्राम पंचायत का यह निर्णय न केवल गांव बल्कि पूरे क्षेत्र में सामाजिक चेतना और सकारात्मक बदलाव का संदेश दे रहा है। यह पहल भविष्य में अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण बन सकती है।
