गूल मरम्मत नहीं होने से बागवानी और नगदी फसलों को भारी नुकसान, किसान जुगाड़ से कर रहे सिंचाई
टिहरी गढ़वाल के छानी टोलका तोक में क्षतिग्रस्त गूल से आम, अमरूद, हल्दी, अदरक जैसी फसलें प्रभावित, किसान कर रहे मेहनत लेकिन विभाग उदासीन
गजा (टिहरी गढ़वाल), Report: D.P.Uniyal |
चंबा विकासखंड की मखलोगी पट्टी के ग्राम पंचायत फैगुल के अंतर्गत छानी टोलका तोक के ग्रामीण इन दिनों सिंचाई संकट से जूझ रहे हैं। वर्षों से क्षतिग्रस्त गूल (सिंचाई नहर) की मरम्मत न होने से बागवानी और नगदी फसलों को भारी नुकसान हो रहा है।
कृषक नरेंद्र सिंह धनोला ने बताया कि उन्होंने और अन्य ग्रामीणों ने वर्षों से क्षतिग्रस्त गूल पर गोबर, मिट्टी और जूट से जुगाड़ बनाकर पेड़ों और फसलों के लिए पानी लाने का प्रयास किया, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है।
गूल की मरम्मत न होने से आम, अमरूद, लीची, कटहल, आड़ू जैसे फलों के पेड़ों और हल्दी, अदरक, मिर्च, अरबी, राई, पालक, बीन जैसी नगदी फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। इससे जैविक खेती के माध्यम से आय बढ़ाने के प्रयासों को गहरी चोट लगी है।
नरेंद्र सिंह धनोला ने बताया कि उन्होंने 26 मार्च 2025 को जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल को पत्र भेजकर गूल की मरम्मत की मांग की थी। साथ ही 7 नवंबर 2024 को ग्राम पंचायत फैगुल की खुली बैठक में प्रस्ताव संख्या 04 के माध्यम से गूल की मरम्मत अथवा 4 इंच की प्लास्टिक पाइप से जल आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसे लघु सिंचाई विभाग को भेजा गया। लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई।
पूर्व सैनिक संगठन के प्रवक्ता भूपेंद्र सिंह धनोला ने भी तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने बताया कि वर्षों पहले इसी क्षेत्र की दो गूलों से सैकड़ों नाली भूमि में धान व गेहूं की खेती होती थी, लेकिन अब पानी की अनुपलब्धता के चलते खेत बंजर हो गए हैं।
📢 किसानों की अपील:
सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात तो करती है, लेकिन जमीनी हकीकत में विभागीय लापरवाही योजनाओं को पलीता लगा रही है। स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि गूल की मरम्मत या वैकल्पिक सिंचाई योजना शीघ्र स्वीकृत की जाए, ताकि पहाड़ी क्षेत्रों में भी आर्थिक आत्मनिर्भरता और जैविक खेती का सपना साकार हो सके।
