धर्म शक्ति दिवस पर रामलीला में रावण-जटायु महासंग्राम, डिजिटल लक्ष्मण रेखा ने मोहा दर्शकों का मन
भव्य रामलीला महोत्सव के छठे दिन शूर्पणखा लीला और सीता हरण का मंचन, पुष्पक विमान व लेजर तकनीक से सजीव हुए रामायण के प्रसंग
देहरादून। श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून (पंजीकृत) की ओर से रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान में आयोजित ‘भव्य रामलीला महोत्सव-2026’ के छठे दिवस को ‘धर्म शक्ति दिवस’ के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर शूर्पणखा लीला और सीता हरण के प्रसंगों का भव्य मंचन किया गया। आधुनिक लेजर तकनीक, डिजिटल चिंगारियों और आकर्षक दृश्य संयोजन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मंचन के दौरान आकाश मार्ग में पुष्पक विमान के माध्यम से रावण और जटायु के महासंग्राम का रोमांचक दृश्य प्रस्तुत किया गया। वहीं, डिजिटल लेजर वॉल से निर्मित लक्ष्मण रेखा और उसे पार करने के प्रयास के दौरान रावण के स्पर्श से निकलती डिजिटल चिंगारियों ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। डिजिटल वन, कुटिया और पुष्पक विमान के प्रभावशाली संयोजन ने सीता हरण के प्रसंग को भव्य एवं जीवंत स्वरूप प्रदान किया।
सनातन परंपराओं के संरक्षण में योगदान के लिए सम्मान
‘धर्म शक्ति दिवस’ के अवसर पर सनातन संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं के संरक्षण में योगदान के लिए श्री टपकेश्वर महादेव मंदिर के प्रमुख श्री श्री 108 महंत कृष्णगिरी महाराज तथा श्री गंगा सभा, हरकी पैड़ी, हरिद्वार के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सीडब्ल्यूसी सदस्य गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा कि यह रामलीला धार्मिक सद्भाव और सर्वधर्म समभाव की मिसाल है। उनके अनुसार, वर्ष 2025 में रामलीला को डिजिटल माध्यमों से 82 लाख से अधिक लोगों ने देखा। उन्होंने गुरु नानक मैदान में आयोजित इस आयोजन को सनातन संस्कृति और सिख परंपरा के आपसी सम्मान एवं सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताया।
आधुनिक तकनीक से नई पीढ़ी तक पहुंच रही ऐतिहासिक रामलीला
टपकेश्वर महादेव मंदिर के महंत श्री श्री 108 कृष्णगिरी महाराज ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से सनातन परंपराओं का संरक्षण आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला को आधुनिक तकनीक के साथ भव्य रूप में प्रस्तुत करने के प्रयास की सराहना की।
समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि वर्ष 1952 से पुरानी टिहरी में चली आ रही ऐतिहासिक रामलीला अब देहरादून में नई ऊर्जा और आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ रही है। लेजर और डिजिटल तकनीक के माध्यम से पारंपरिक प्रसंगों को नई पीढ़ी के सामने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ‘धर्म शक्ति दिवस’ का उद्देश्य सनातन संस्कृति, धार्मिक संस्थाओं और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान को मजबूत करना है।
कई गणमान्य व्यक्ति रहे उपस्थित
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सीडब्ल्यूसी सदस्य गुरदीप सिंह सप्पल, टपकेश्वर महादेव मंदिर के महंत श्री श्री 108 कृष्णगिरी महाराज, श्री गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ, मधुबन ग्रुप ऑफ होटल्स के हेमंत कोच्चर, श्री हनुमान चालीसा समूह की अध्यक्ष सारिका चौधरी, सचिव रजनी वर्मा, शिवप्रसाद नौटियाल, हेमंत माटा और सौरभ शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
1952 से जुड़ी है पुरानी टिहरी की रामलीला की परंपरा
समिति के अनुसार, वर्ष 1952 से पुरानी टिहरी में आयोजित होती आ रही ऐतिहासिक रामलीला को टिहरी बांध के कारण पुरानी टिहरी के जलमग्न होने के बाद वर्ष 2023 में देहरादून में पुनर्जीवित किया गया। समिति का कहना है कि वर्ष 2025 में इस रामलीला को डिजिटल माध्यमों से 82 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा। इसी उत्साह से प्रेरित होकर वर्ष 2026 में समिति ने डिजिटल माध्यमों से एक करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है।
भव्य रामलीला महोत्सव-2026 का आयोजन 8 से 25 अक्टूबर तक श्री गुरु नानक मैदान, रेसकोर्स, देहरादून में किया जा रहा है। रामलीला का मंचन 11 से 21 अक्टूबर तक निर्धारित है। कार्यक्रम के अनुसार, 20 अक्टूबर को रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन तथा 21 अक्टूबर को भगवान श्रीराम के राजतिलक का आयोजन किया जाएगा।
समिति ने धर्मप्रेमी जनता से सपरिवार महोत्सव में पहुंचकर रामलीला के मंचन का आनंद लेने और उत्तराखंड की ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने की अपील की है।
