राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में टिहरी जनपद के नकोट मंडल का अनुपम आयोजन, स्वयंसेवकों के अनुशासन और समाज की सहभागिता ने रचा इतिहास
नकोट: टिहरी जनपद के चंबा खंड अंतर्गत नकोट मंडल ने आज इतिहास का साक्षी बनकर एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया। अवसर था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के पावन आयोजन का। इस शुभ अवसर पर कस्बा नकोट की सड़कों पर स्वयंसेवकों का भव्य पथ संचलन निकला, जिसने न केवल ग्रामीण अंचल को देशभक्ति से सराबोर किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अनुशासन, संगठन और संस्कृति का जीवंत संदेश भी छोड़ गया।
पथ संचलन में कदम से कदम मिलाते स्वयंसेवक जब एक स्वर में घोष करते हुए आगे बढ़े तो पूरा वातावरण राष्ट्रगौरव और आत्मीयता की भावना से गूंज उठा। ग्रामीणों की आँखों में गर्व की चमक थी और बच्चों में कौतूहल। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि संघ का शताब्दी वर्ष महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जन-मन और संस्कृति का पर्व है।
मुख्य वक्ता और विचारधारा का संचार
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री स्वराज (जिला प्रचार प्रमुख, टिहरी) ने अपने विचारों में संघ की स्थापना से लेकर अब तक की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य समाज को संगठित कर राष्ट्रहित में समर्पित करना है। शताब्दी वर्ष इस यात्रा का वैचारिक पड़ाव है, जो हमें अतीत की प्रेरणा और भविष्य का मार्गदर्शन देता है।
आयोजन समिति और गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर कार्यक्रम अध्यक्ष श्री मोर सिंह धनोला और कार्यक्रम संयोजक श्री सुभाष उनियाल ने आयोजन की धारा को दिशा दी। उनके नेतृत्व में पथ संचलन अनुशासन और गरिमा के साथ संपन्न हुआ।
इस पथ संचलन को सफल बनाने में अनेक स्वयंसेवकों और गणमान्य नागरिकों की भूमिका उल्लेखनीय रही। श्री पुरुषोत्तम उनियाल, श्री मकान सिंह, श्री भैरव दत्त बड़ोनी, श्री अरविंद भट्ट, श्री राहुल कुट्टी (क्षेत्र पंचायत सदस्य), श्री लक्ष्मी प्रसाद, श्री कुलदीप, श्री राजेंद्र सिंह चौहान, श्री मनोज चमोली, श्री हुकम सिंह धनोला, श्री भगवान सिंह धनोला (पूर्व प्रधान), श्री नरेंद्र सिंह धनोला, श्री आयुष धनोला, श्री ऋषभ, श्री आशुतोष बहुगुणा आदि ने अपनी उपस्थिति और सक्रियता से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
शताब्दी वर्ष का महत्व
संघ का शताब्दी वर्ष केवल संगठन का उत्सव नहीं, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक परंपरा और जीवन मूल्यों का भी उत्सव है। यह वर्ष हमें याद दिलाता है कि अनुशासन, सेवा और संगठन के मार्ग पर चलकर ही समाज मजबूत बनता है। नकोट जैसे ग्रामीण क्षेत्र में इस प्रकार का आयोजन यह दर्शाता है कि संघ की जड़ें गांव-गांव तक गहराई से पहुंच चुकी हैं और उसका प्रभाव समाज के हर वर्ग को प्रेरित कर रहा है।
स्थानीय जनभावना और समाज की सहभागिता
कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता रही आमजन की सहभागिता। गांव की गलियों में बच्चे तिरंगे लहराते दिखे, महिलाएं घरों से बाहर निकलकर पथ संचलन का स्वागत करती नजर आईं और बुजुर्ग गर्व से इस आयोजन को देख रहे थे। इससे स्पष्ट था कि यह आयोजन केवल संघ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पूरे समाज का उत्सव बन गया।
अनुशासन और संस्कृति का संदेश
संघ का पथ संचलन महज एक परेड या शोभायात्रा नहीं है। यह अनुशासन, आत्मसंयम और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। नकोट मंडल में निकला यह पथ संचलन आने वाली पीढ़ियों को संदेश देता है कि संगठित समाज ही सशक्त समाज होता है।
नकोट मंडल का यह आयोजन संघ के शताब्दी वर्ष की गरिमा को और बढ़ाता है। यह न केवल संगठन की शक्ति का परिचायक है, बल्कि यह ग्रामीण समाज की एकजुटता, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और राष्ट्रीय भावना का भी जीवंत उदाहरण है।
टिहरी जनपद के इतिहास में यह दिन लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा, जब एक छोटे से कस्बे की गलियों ने राष्ट्रभक्ति की गूंज सुनी और आने वाली पीढ़ियों को यह प्रेरणा दी कि समर्पण, अनुशासन और संगठन ही राष्ट्रनिर्माण की वास्तविक धुरी हैं।
