पूर्णानन्द स्टेडियम मुनिकीरेती में आयोजित होगा दस दिवसीय सरस मेला, देशभर से आएंगे स्वयं सहायता समूह, किसान और कलाकार; पाण्डवाज, मंगलेश डंगवाल, माया उपाध्याय, इन्दर आर्य और अमित सागर देंगे प्रस्तुतियां
टिहरी/दिनांक 29 सितम्बर, 2025।
उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि का प्रतीक सरस आजीविका मेला-2025 आगामी 6 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक पूर्णानन्द स्टेडियम, मुनिकीरेती (टिहरी गढ़वाल) में आयोजित किया जा रहा है। ग्राम्य विकास विभाग, उत्तराखण्ड एवं जिला प्रशासन टिहरी गढ़वाल के तत्वावधान में होने वाला यह दस दिवसीय मेला ग्रामीण महिलाओं की आजीविका, हस्तशिल्प और परंपरागत ज्ञान को मंच प्रदान करेगा।
यह मेला सम्पूर्ण भारत के ग्रामीण अंचल की महिलाओं द्वारा उत्पादित जैविक एवं पारंपरिक खाद्य पदार्थों, हस्तशिल्प और दस्तकारी उत्पादों की बिक्री और प्रदर्शन का अवसर बनेगा। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों, गोष्ठियों और रोजगार मेलों के माध्यम से यह आयोजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय प्रतिभा को नया आयाम देगा।
भव्य शुभारम्भ और विशेष आयोजन
मेले का शुभारम्भ 6 अक्टूबर को अपराह्न 3 बजे मुख्य अतिथि द्वारा किया जाएगा। उद्घाटन अवसर पर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम भी होंगे —
- लखपति दीदी मेले का शुभारम्भ।
- एनआरएलएम की 12 आर्थिक गतिविधियों का लोकार्पण।
- 10 सीएलएफ की योजनाओं का शिलान्यास।
- जनपद के 11वीं-12वीं के छात्र-छात्राओं के लिए जेईई/नीट ऑनलाइन कोचिंग क्लास (भौतिक विज्ञान) का लोकार्पण।
शाम 5 बजे से लोकप्रिय लोकगायक पाण्डवाज अपनी प्रस्तुति देंगे।
विविध कार्यक्रमों की श्रृंखला
- 7 अक्टूबर: कृषि विभाग द्वारा किसान गोष्ठी और सांय 5 बजे कवि सम्मेलन।
- 8 अक्टूबर: प्रातः लखपति दीदी गोष्ठी और शाम को लोकगायक मंगलेश डंगवाल का कार्यक्रम।
- 9 अक्टूबर: पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन और शाम को रजनीकान्त सेमवाल की प्रस्तुति।
- 10 अक्टूबर: खाद्य संरक्षा, विधिक साक्षरता शिविर एवं आपदा प्रबंधन प्रदर्शनी; शाम को लोकगायिका माया उपाध्याय का कार्यक्रम।
- 11 अक्टूबर: महिला सशक्तिकरण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ विषयक गोष्ठी; सांयकाल सौरभ मैठानी का कार्यक्रम।
- 12 अक्टूबर: रोजगार मेला और गायक मधुर शर्मा की प्रस्तुति।
- 13 अक्टूबर: क्रेता-विक्रेता सम्मेलन; सांय इन्दर आर्य का सांस्कृतिक कार्यक्रम।
- 14 अक्टूबर: आरबीआई द्वारा गुल्लक 2.0 कार्यक्रम; सांयकाल अमित सागर का गायन।
- 15 अक्टूबर (समापन दिवस): सुबह 11.30 बजे से पुरस्कार वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मेला सम्पन्न होगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक धरोहर का संगम
सरस मेला केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि ग्रामीण महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक विरासत का महोत्सव है। यहां आकर लोग न केवल जैविक उत्पाद और हस्तशिल्प खरीद सकते हैं, बल्कि देशभर की विविध लोक परंपराओं और कलाओं का आनंद भी उठा सकेंगे।
