25 वर्षों में मातृ मृत्यु दर में 77% कमी, राज्य के हर कोने तक पहुंच रही चिकित्सा सुविधाएं — 1985 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से 34 लाख लोगों को लाभ
देहरादून, 6 नवम्बर 2025।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी, चिकित्सकों की संख्या में बढ़ोतरी और आधुनिक ढांचे के सुदृढ़ीकरण ने प्रदेश को “स्वस्थ उत्तराखंड, समृद्ध उत्तराखंड” की दिशा में अग्रसर कर दिया है।
राज्य गठन के 25 वर्षों में उत्तराखंड ने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में लंबी छलांग लगाई है। वर्तमान में प्रदेश में 13 जिला चिकित्सालय, 21 उपजिला चिकित्सालय, 80 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 577 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और लगभग 2000 मातृ-शिशु कल्याण केंद्र संचालित हैं। हाल ही में 6 उपजिला चिकित्सालय, 6 सीएचसी और 9 पीएचसी के उन्नयन को मंजूरी दी गई है।
स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार और नई पहलें
सेलाकुई (देहरादून) और गेठिया (नैनीताल) में 100-100 शैय्यायुक्त मानसिक चिकित्सालयों का निर्माण तेजी से जारी है। भारत सरकार के सहयोग से उत्तरकाशी, गोपेश्वर, बागेश्वर और रुड़की में 200 शैय्यायुक्त क्रिटिकल केयर ब्लॉक, जबकि हल्द्वानी और नैनीताल में 50-50 शैय्यायुक्त ब्लॉक तैयार किए जा रहे हैं।
देश में पहली बार एम्स ऋषिकेश के सहयोग से हेली-एम्बुलेंस सेवा शुरू की गई है, जिससे दुर्गम इलाकों तक आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंची हैं।
मातृ व शिशु स्वास्थ्य में ऐतिहासिक सुधार
राज्य गठन के समय शिशु मृत्यु दर 52 प्रति हजार थी, जो घटकर अब 20 रह गई है। इसी प्रकार मातृ मृत्यु दर 450 प्रति लाख से घटकर 91 रह गई — यानी 77 प्रतिशत की कमी। सकल प्रजनन दर भी 3.3 से घटकर 1.7 पर आ चुकी है।
संस्थागत प्रसव दर 21 प्रतिशत से बढ़कर अब 83.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि संपूर्ण प्रतिरक्षण दर 88.6 प्रतिशत दर्ज की गई है।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि सरकार का लक्ष्य मातृ मृत्यु दर को 70 और नवजात मृत्यु दर को 12 प्रति लाख जीवित जन्म तक लाना है।
चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या में वृद्धि
राज्य निर्माण के समय स्वास्थ्य विभाग में 1621 डॉक्टरों के पद थे, जो अब बढ़कर 2885 हो गए हैं। इनमें से 2598 डॉक्टर वर्तमान में कार्यरत हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी गई है।
राज्य सरकार ने 1399 नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति की है, वहीं एएनएम के 2295 पदों में से 1918 पद भरे जा चुके हैं।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से ग्रामीण स्वास्थ्य सशक्त
प्रदेश में अब तक 1985 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) स्थापित किए जा चुके हैं, जिनसे हर वर्ष लगभग 34 लाख लोग लाभान्वित हो रहे हैं। इन केंद्रों पर उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मुख एवं स्तन कैंसर की जांच और निवारक परामर्श जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
108 आपातकालीन सेवा बनी जीवन रक्षक
वर्ष 2008 में शुरू हुई 108 एम्बुलेंस सेवा अब राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है। वर्तमान में 272 एम्बुलेंस सेवाएं संचालित हैं, जिनमें बेसिक, एडवांस और बोट एम्बुलेंस शामिल हैं। वर्ष 2019 से अगस्त 2025 तक इस सेवा से 8.79 लाख से अधिक लोगों को आपातकालीन सहायता मिली है।
जनऔषधि और आर्थिक सहायता योजनाएं
प्रदेश में 335 प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र संचालित हैं, जहां दवाएं बाजार मूल्य से 50 से 80 प्रतिशत सस्ती उपलब्ध हैं। इसके अलावा राज्य व्याधि सहायता निधि समिति के अंतर्गत अब तक 1045 गरीब मरीजों को 12.85 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है।
टीबी उन्मूलन और तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा
“टीबी मुक्त उत्तराखंड” अभियान के अंतर्गत अब तक 2182 पंचायतें टीबी मुक्त घोषित की जा चुकी हैं। 18,000 से अधिक निक्षय मित्र टीबी मरीजों के सहयोग में कार्यरत हैं।
चारधाम यात्रा के दौरान सरकार द्वारा सभी धामों और यात्रा मार्गों पर डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और जीवनरक्षक उपकरणों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है। स्वास्थ्य परामर्श अब 13 भाषाओं में उपलब्ध कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का वक्तव्य
मुख्यमंत्री धामी ने कहा,
“हमारी सरकार का लक्ष्य है कि राज्य का हर नागरिक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ सके। मातृ और शिशु मृत्यु दर में ऐतिहासिक कमी और संस्थागत प्रसव में बढ़ोतरी हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। हमने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए रिकॉर्ड निवेश किया है। हेली-एम्बुलेंस, आयुष्मान आरोग्य केंद्र, नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा के विस्तार से हमने स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाया है।”
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
डॉ. कुमार ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में उत्तराखंड ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। एनएचएम, आयुष्मान भारत, टेलीमेडिसिन, 108 सेवा और जनऔषधि केंद्र जैसी योजनाओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था को नई ऊँचाई दी है।
“यह परिवर्तन केवल योजनाओं का नहीं, बल्कि संकल्प और प्रतिबद्धता का परिणाम है। हमारा लक्ष्य है कि हर गांव और हर व्यक्ति तक सस्ती, प्रभावी और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचें,” — डॉ. आर. राजेश कुमार।
स्वास्थ्य क्रांति के दावे और जमीनी हकीकत — एक गहन समीक्षा
राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर उत्तराखंड सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में हुए सुधारों को “स्वास्थ्य क्रांति” का नाम दिया है। आंकड़े बताते हैं कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में ऐतिहासिक कमी आई है, संस्थागत प्रसव दर में वृद्धि हुई है और राज्यभर में 1985 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से लाखों लोग स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने, चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने और आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करने के प्रयास प्रशंसनीय हैं।
परंतु, इस प्रगति के समानांतर कुछ सवाल भी उठ खड़े हुए हैं। टिहरी जनपद सहित पर्वतीय क्षेत्रों में आज भी अनेक अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, उपकरणों की अनुपलब्धता और नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य केंद्रों के भवन तो बने हैं, लेकिन कई स्थानों पर ताले लगे रहते हैं या फिर केवल नाममात्र की सेवाएं मिल रही हैं।
स्थानीय जनता के आंदोलन और धरने इस बात की ओर संकेत करते हैं कि “स्वास्थ्य क्रांति” के सरकारी दावे हर क्षेत्र में समान रूप से साकार नहीं हुए हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है, बल्कि एक संवेदनशील सामाजिक प्रश्न भी है — क्योंकि स्वास्थ्य सुविधा हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।
राज्य की उपलब्धियों को नकारा नहीं जा सकता, किंतु यह भी स्वीकार करना होगा कि विकास तभी सार्थक है जब उसका लाभ अंतिम छोर तक पहुंचे। टिहरी जैसे जिलों में स्वास्थ्य ढांचे की वास्तविक सुदृढ़ता तभी संभव है जब जन-आवाजों को सुनकर योजनाओं का क्रियान्वयन धरातल पर प्रभावी रूप से किया जाए।
संपादकीय टिप्पणी:
“आंकड़े उपलब्धियों का चित्र प्रस्तुत करते हैं, लेकिन ज़मीनी अनुभव सच्चाई का आईना होते हैं। उत्तराखंड की स्वास्थ्य क्रांति तभी पूर्ण मानी जाएगी जब पहाड़ के हर गांव में उपचार, डॉक्टर और दवा समान रूप से उपलब्ध हो।”
⚖️ Disclaimer (अस्वीकरण):
यह संपादकीय लेख उपलब्ध सरकारी आंकड़ों, प्रेस विज्ञप्तियों और जन प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार स्वतंत्र विश्लेषण हैं, जिनका उद्देश्य किसी संस्था, व्यक्ति या विभाग की आलोचना नहीं, बल्कि जनहित में वस्तुनिष्ठ विमर्श प्रस्तुत करना है।
