आखिर कब तक उपेक्षा का दंश झेलेगा रानीचौंरी?
How long will Ranichori bear the brunt of neglect?
रिपोर्ट: हर्षमणि बहुगुणा
सरहद का साक्षी,
टिहरी महाराज सुदर्शन शाह से ही टिहरी- ऋषिकेश के राजमार्ग पर अवस्थित रानी की चौंरी (रानीचौंरी) ऐतिहासिक व रमणीक कस्बा है। मां श्री कण्ठा व चन्द्रबदनी की मध्यस्थता का साक्षी पुण्यासिनी का सिद्धपीठ, महाराजाओं की यात्रा का पड़ाव शायद आज उपेक्षा का शिकार है या यह कहा जाय कि उपेक्षित है तो कोई अत्युक्ति नहीं होगी।
स्वतंत्रता के बाद से ही चार- छ: दुकानें थी, आज भी विशेष परिवर्तन नहीं हुआ। १९७६ मार्च में पन्त नगर कृषि विश्वविद्यालय का पर्वतीय परिसर, २००६ में औद्यानिक विश्व विद्यालय घोषित कर दिया गया था, किन्तु राजनीति के षडयंत्र का शिकार- वर्ष २००१ में खुले महाविद्यालय भरसार में इस, यहां के विश्वविद्यालय को स्थानांतरित या नयी तरह से खोल दिया या संचालित किया।

यहां के संभ्रान्त व्यक्तियों ने विश्वविद्यालय रोकने का कोई विशेष प्रयास व आग्रह नहीं किया। जहां तक मुझे याद है कि मात्र डारगी के प्रधान श्री विजय सिंह नेगी जी का प्रयास सराहनीय रहा, किन्तु कतिपय व्यक्तियों ने यह कह कर कि हमें क्या लाभ है सहयोग ही नहीं किया।
आज यहां से सब नदारद हैं- बीज भण्डार, रेडक्रास, जिला सहकारी बैंक, पटवारी चौकी यहां नहीं बन पाई, यहां तक कि आयुर्वेदिक अस्पताल को जगह उपलब्ध नहीं हो सकी। कहीं शायद नेट की असुविधा के चलते डाकघर भी न हटाना पड़े ? सड़क का सुधारीकरण किया गया किन्तु बाजार में सड़क को ऊंचा कर कतिपय पुरानी दुकानों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
विभाग के कर्मचारी रानीचौंरी में आवास नहीं रख पा रहे हैं।
इण्टर कॉलेज या अन्य किसी भी विभाग के कर्मचारी रानीचौंरी में आवास नहीं रख पा रहे हैं। जो बहुत बड़ी बिडम्वना है। शायद इस के दोषी भी हम स्वयं ही है। इस कस्बें में कहीं पर एक बाथरूम (लघु शंका के लिए) उपलब्ध नहीं है। मेरी अल्प मति से इस क्षेत्र की संभ्रान्त व्यक्तियों व जनता से विनती है कि रानीचौंरी की उपेक्षा को सहन न कर उन्नति के मार्ग को प्रशस्त करवाने में सहयोग करने का कार्य / कष्ट करेंगे।
