[su_highlight background=”#880930″ color=”#ffffff”]सरहद का साक्षी @ डॉ0 दलीप सिंह बिष्ट[/su_highlight]
[su_button background=”#8b16e6″ size=”2″]रुद्रप्रयाग:[/su_button] राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अगस्त्यमुनि में अंग्रेजी विभाग एवं संस्कृत विभाग द्वारा संयुक्त रूप से “मीटिंग प्वाइंट्स विटवीन इण्डियन एण्ड वेस्टर्न एस्थेटिक्स” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में प्रो.डी.आर.पुरोहित- पूर्व निदेशक, लोक कला एवं संस्कृति विभाग एवं पूर्व विभागाध्यक्ष अंग्रेजी विभाग, केन्द्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल; प्रो. शिवशंकर मिश्र – विभागाध्यक्ष शोध-विभाग, श्रीलाल बहादुर शास्त्री नेशनल संस्कृत यूनिवर्सिटी न्यू दिल्ली, पूर्व उपकुलसचिव एवं प्रभारी कुलसचिव उत्तराखण्ड संस्कृत यूनिवर्सिटी; प्रो. रामविनय सिंह- प्रसिद्ध साहित्यकार, लेखक, कवि एवं भाषाविद्, संस्कृत विभाग डी.ए.वी.पी.जी. कॉलेज देहरादून; डॉ. सञ्जू प्रसाद ध्यानी- सहायक निदेशक उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा विभाग एवम् उपसचिव उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा परिषद् ने अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया।

सर्वप्रथम कार्यक्रम की आयोजक सचिव डॉ. मनीषा सिंह, असि.प्रो. संस्कृत विभाग द्वारा सरस्वती वन्दना के साथ वेबिनार की प्रासंगिकता एवम् उपादेयता पर प्रकाश डाला गया। इसके पश्चात् वेबिनार की संरक्षिका एवं महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. पुष्पा नेगी द्वारा औपचारिक रूप से वेबिनार से जुड़े सभी मनीषियों का स्वागत किया गया। तदनन्तर प्राचार्य महोदय ने अपने वक्तव्य में महाकवि कालिदास का उदाहरण देते हुए भारतीय सौन्दर्यशास्त्र की महत्ता पर अपना उद्बोधन दिया। आचार्य मम्मट के काव्यहेतु का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि प्रतिभा के साथ ही काव्यशास्त्रीय नियमों का ज्ञान होना भी अत्यावश्यक है।

इसके बाद डॉ. सञ्जू प्रसाद ध्यानी ने अपने वक्तव्य में वेबिनार के विषय पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने भारतीय एवं पाश्चात्य काव्यशास्त्र से सम्बन्धित विभिन्न बिन्दुओं पर प्रकाश डाला। तत्पश्चात् मुख्य वक्ता प्रो. रामविनय सिंह ने सौन्दर्यशास्त्र पर अपना मन्त्रमुग्ध कर देने वाला व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने भास, कालिदास आदि महाकवियों एवं मम्मट आदि काव्यशास्त्रियों की सौन्दर्यदृष्टि के साथ ही अरस्तु, प्लेटो से लेकर शेक्सपीयर आदि पाश्चात्य विद्वानों के सौन्दर्य सम्बन्धी विचारों को प्रस्तुत किया। इसके पश्चात् मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित संस्कृत के मूर्धन्य विद्वान प्रो. शिवशंकर मिश्र ने दर्शन की दृष्टि से सौन्दर्य शास्त्र की विशद् व्याख्या की।
उन्होंने अपने वक्तव्य में भारतीय संस्कृति के सत्यं शिवं सुन्दरम् से सुशोभित स्वरूप का दर्शन कराया एवं साथ ही भारतीय दृष्टि पाश्चात्य दृष्टि से किस प्रकार भिन्न है, इस पर भी अपने विचार व्यक्त किये। इसके बाद मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित विश्वविख्यात प्रो.डी.आर.पुरोहित ने अपने वक्तव्य में प्लेटो, अरस्तु, कान्त, हीगल आदि पाश्चात्य एवं भरतमुनि, अभिनवगुप्त, आनन्दवर्धन आदि भारतीय काव्यशास्त्रियों के ग्रन्थों पर प्रकाश डाला, साथ ही सौन्दर्यशास्त्र से सम्बन्धित रस, अलंकार, ध्वनि, वक्रोक्ति, रीति एवम् औचित्य सम्प्रदाय पर विस्तृत चर्चा की।

कार्यक्रम का संचालन वेबिनार के संयोजक डॉ. जितेन्द्र सिंह के द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम की आयोजक सचिव डॉ. मनीषा सिंह के द्वारा किया गया। इस अवसर पर कुलसचिव- एस.एस.जे.यूनिवर्सिटी अल्मोड़ा उत्तराखण्ड, प्रो.आर.सी.शर्मा- केन्द्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल, प्रो. विनीत घिल्डियाल- केन्द्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल, प्रो. आशुतोष गुप्त- केन्द्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल, प्रो. सविता भट्ट, डी.ए.वी.पी.जी.क़ॉलेज देहरादून, डॉ. प्रज्ञा सिंह- मण्डलाधिकारी, आजमगढ़, उत्तरप्रदेश, डॉ. मृदुला रस्तोगी- प्रो. नारी शिक्षा निकेतन, लखनऊ, डॉ. दलीप बिष्ट- मुख्य समन्वयक, डॉ. सीताराम नैथानी- समन्वयक, डॉ. सुधीर पेटवाल- सह-आयोजक के अतिरिक्त डॉ. पूनम भूषण, डॉ. हरिओम बहुगुणा, डॉ. के.पी.चमोली, डॉ. दयाधर सेमवाल, डॉ. अञ्जना फर्सवाण, डॉ. मकान प्रकाश विश्वकर्मा, डॉ. प्रकाश फौन्दनी, डॉ. निधि छाबड़ा, डॉ. तनुजा मौर्य, डॉ. ममता सेमवाल एवं डॉ. नीतू सिंह आदि उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त उत्तराखण्ड में स्थित लगभग 46 महाविद्यालयों के प्राध्यापकगणों तथा महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, इलाहाबाद (प्रयागराज), हरियाणा, हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों के प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भी इस ज्ञानयज्ञ में प्रतिभाग किया।
