रिपोर्ट: कवि सोमवारीलाल सकलानी निशांत,
कमांद, चंबा: लंबे समय तक अपनी कर्मभूमि थौलधार प्रखंड के ग्राम बगोड़ी में आज श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का श्रवण के अवसर पर क्षेत्र से डेड वर्ष बाद रू-ब-रू हुआ।
श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के अवसर पर व्यास पीठ पर श्री देवेंद्र प्रसाद उनियाल जी के मुखारविंद से कथा का श्रवण किया। भारतीय धर्म, संस्कृति, महाकाव्य, वेद और पुराणों में वर्णित अनेक प्रकार की रोचक कथाएं भरी पड़ी है, जिनको कालांतर में व्यास पीठ पर बैठे हुए आचार्यों के द्वारा सम-सामयिक दृष्टिकोण से जनता के सम्मुख प्रस्तुत किया जाता रहा है जो कि धर्म संस्कृति को बचाए रखने का एक अद्भुत प्रयास भी है।
बगोड़ी गांव प्रखंड का एक ऐसा गांव है, जिसका अपना एक नाम रहा है। नकोट बगोडी खमोली, धमाडी आदि अनेकों ऐसे गांव हैं जो कि सांस्कृतिक केंद्र रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 94 के समीप अवस्थित यह गांव विद्वता के लिए काफी चर्चित है। सबसे बड़ी विशेषता इस गांव की यह है कि इस गांव में शत प्रतिशत परिवार के सदस्य राजकीय सेवाओं में कार्यरत रहे हैं। इसके अलावा इस गांव में निवास करने वाले जोशी परिवार किसी समय कुर्मांचल से यहां आकर बसे होंगे। आज भी अपने धार्मिक परंपरा को बनाए हुए हैं।
यद्यपि गांव के अधिकांश लोग महानगरों में पलायन कर चुके हैं लेकिन माटी का मोह बरबस अपने गांव में खींच कर के ले आता है। आज की कथा स्वर्गीय श्री मधुसूदन जोशी जी (सुपुत्र स्व. श्री जोगेश्वर प्रसाद जोशी / स्व. संपत्ति देवी जोशी) की स्मृति में उनके परिवार जनों ने आयोजित किया है। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुलोचना जोशी तथा पुत्र श्री कैलाश जोशी के अलावा उनके सहोदर भाई डॉ रमेश जोशी, श्री विनोद जोशी तथा परिवार जन, श्रीमती पूनम जोशी, वीना जोशी, श्री मंगल आनंद जोशी, श्री मुसद्दीलाल जोशी आदि के सहयोग से संपन्न किया जा रहा है।
आज की कथा में जोशी परिवार के अनेकों रिश्तेदार, क्षेत्रीय लोग उपस्थित हुए हैं। जिनमें श्री चंडी प्रसाद उनियाल, श्री मार्कंडेय प्रसाद बडोनी, कवि सोमवारी लाल सकलानी निशांत आदि उपस्थित थे।
व्यासपीठ से कथावाचक श्री देवेंद्र उनियाल जी के द्वारा आज अजामिल की कथा, हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष की कथाएं, भक्त प्रल्हाद की कथा, गज और ग्राह की कथा, समुद्र मंथन की कथा, राजा बलि की कथा बड़े रोचक ढंग से प्रस्तुत की गई।
श्री व्यास जी ने कीर्तन, श्रवण, अर्चन, वंदन, दास्य ससांख्य तथा आत्म निवेदन के बारे में विवेचना प्रस्तुत की जिस कि श्रोता गणों ने बहुत ही रुचि पूर्वक आत्मसात किया। इसके अलावा अनेकों रोचक कथाएं महाभारत की कथाओं के उद्धरण सहित श्रोता गणों के सम्मुख प्रस्तुत की गई।
क्षेत्र के नजदीकी कस्बा कमांद के नजदीक अवस्थित होने के कारण यह गांव शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी है। निकटवर्ती गांव नकोट तथा खमोली, धमाड़ी आदि हैं। गांव के लगभग शत-प्रतिशत पढ़े लिखे हैं और राजकीय सेवाओं में भी अपना योगदान दे रहे हैं।
आज की श्रीमद्भागवत कथा महापुराण में व्यास जी ने धर्म और संस्कृति को अक्षुण्ण रखने के लिए कथा के बीच बीच में अनेक व्याख्यान भी प्रस्तुत किए।


