सरहद का साक्षी,
रानीचौरी: सावली के नाथ बुद्ध भैरव, गांव का ही नहीं सबका रक्षक, प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से आवाज़ देकर आगाह करने वाला भैरव देव जो भगवान भूतनाथ रुद्र का पंचम अवतार हैं, को बहुत विघ्नों के बाद स्थान देने का शायद समय आ गया है। अनेक उतार चढ़ाव व परेशानी के बाद भगवान भैरवनाथ की मूर्ति को तेरह जून को उनके मन्दिर में स्थान दे दिया। बारह जून से चौदह जून तक यह कार्यक्रम केवल पूजन प्राण प्रतिष्ठा का रहा है।
क्षेत्र के ज्योतिष मर्मज्ञ प्रकांड पंडित हर्षमणि बहुगुणा कहते हैं कि भगवान भैरवनाथ की कृपा सभी पर बनी रहे, इस कामना से सभी लोगों के सहयोग से भैरव देव को उनके स्थान मन्दिर में प्रतिष्ठित कर सार्वजनिक हितार्थ पूर्वजों की इच्छा के अनुरूप जहां पर वर्षों से दिया दे कर रोट प्रसाद चढ़ाते थे; एक लघु आकार का स्थान (मंदिर) बनाकर पूजा अर्चना के बाद स्थापित किया, जिसमें सभी लोगों का सहयोग व आशीर्वाद रहा कोरोना महामारी को दृष्टिगत रखते हुए भण्डारे का आयोजन नहीं किया।
उन सब का हार्दिक धन्यवाद एवं आभार जिन्होंने इस पुनीत कार्य में अपना महत्वपूर्ण योगदान व समय दिया। पूजा अर्चना, भोजन व्यवस्था, जल की आपूर्ति, सामग्री एकत्रित करने में सक्रिय भूमिका (नाम अंकित कर मैं उनके योगदान को कम नहीं करना चाहता हूं) आदि। काम छोटा या बड़ा नहीं होता। सेतु बन्ध में गिलहरी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, यहां भी सबका अपेक्षित सहयोग व जिम्मेदारी कृतार्थ करने के लिए प्रर्याप्त है। इसलिए धन्यवाद देना आवश्यक है यह सब मेरी कृतज्ञता भी है। मेरे पास धन्यवाद एवं आभार के अतरिक्त कुछ भी नहीं है। तहेदिल से शुक्रिया, भगवान भैरवनाथ जी से प्रार्थना है कि सबकी मनोकामना पूरी करने की कृपा करेंगे व इस क्षेत्र की जनता पर अपनी कृपा दृष्टि बना कर कोतवाल की भूमिका का निर्वहन भी करेंगे।


