[su_highlight background=”#880930″ color=”#ffffff”]सरहद का साक्षी @हर्षमणि बहुगुणा[/su_highlight]
स्वप्न देखा या कहीं पढ़ा, सच्चाई जो भी हो पर आज का दिन पुत्री दिवस है, मनाया भी जाना चाहिए, हम जिसे नाजों से पालते पोसते हैं और फिर एक दिन पराए घर के लिए विदा कर देते हैं।
“ऐसे में यह सुन्दर सन्देश किसी ने भेजा सभी लोगों को दिल से पढ़ने के लिए शेयर कर रहा हूं, अच्छा लगे तो शेयर कीजिए!”
बाप – बेटी का रिश्ता
बेटी की विदाई के वक्त बाप ही सबसे आखिरी में रोता है क्यों? चलिए आज आपको विस्तार से बताते हैं ।
बाकी सब भावुकता में रोते हैं, पर बाप उस बेटी के बचपन से विदाई तक के बीते हुए पलों को याद कर-कर के रोता है।
माँ बेटी के रिश्तों पर तो बात होती ही है, पर बाप और बेटी का रिश्ता भी समुद्र से गहरा है ।
हर बाप घर के बेटे को गाली देता है, धमकाता है, मारता है, पर वही बाप अपनी बेटी की हर गलती को नकली दादागिरी दिखाते हुए नजर अंदाज कर देता है।
बेटे ने कुछ मांगा तो एक बार डांट देता है पर बेटी ने धीरे से भी कुछ मांगा तो बाप को सुनाई दे जाता है और जेब में हो न हो पर बेटी की इच्छा पूरी कर देता है।
दुनिया उस बाप का सब कुछ लूट ले, तो भी वो हार नहीं मानता पर अपनी बेटी के आंख के आंसू देख कर खुद अंदर से बिखर जाए उसे बाप कहते हैं।
और बेटी भी जब घर में रहती है तो उसे हर बात में बाप का घमंड होता है, किसी ने कुछ कहा नहीं कि वो बेटी तपाक से बोलती है, पापा को आने दे फिर बताती हूं। बेटी घर में रहती तो माँ के आंचल में है, पर बेटी की हिम्मत उसका बाप रहता है ।
बेटी की जब शादी में विदाई होती है तब वो सबसे मिलकर रोती तो है पर जैसे ही विदाई के वक्त कुर्सी समेटते बाप को देखती है, तो जाकर झूम जाती है और लिपट जाती है और ऐसा कस के पकड़ती है अपने बाप को जैसे माँ अपने बेटे को, क्योंकि उस बच्ची को पता है ये बाप ही है जिसके दम पर मैंने अपनी हर जिद पूरी की थी।
खैर बाप खुद रोता भी है और बेटी की पीठ ठोक कर फिर हिम्मत भी देता है, कि बेटा चार दिन बाद आ जाऊँगा तुझको लेने और खुद जान बूझकर निकल जाता है किसी कोने में और उस कोने में जाकर वो बाप कितना फूट फूट कर रोता है, ये बात सिर्फ एक बेटी का बाप ही समझ सकता है।
जब तक बाप जिंदा रहता है, बेटी मायके में हक से आती है और घर में भी जिद कर लेती है और कोई कुछ कहे तो डांट के बोल देती है कि मेरे बाप का घर है, पर जैसे ही बाप मरता है और बेटी आती है तो वो इतनी चीत्कार करके रोती है कि – सारे रिश्तेदार समझ जाते हैं कि बेटी आ गई है।
और वो बेटी उस दिन अपनी हिम्मत हार जाती है, क्योंकि उस दिन उसका बाप ही नहीं उसकी वो हिम्मत भी मर जाती हैं ।।
बाप की मौत के बाद बेटी कभी अपने भाई के घर जिद नहीं करती है, जो मिला खा लिया, जो दिया पहन लिया क्योंकि जब तक उसका बाप था तब तक सब कुछ उसका था यह बात वो अच्छी तरह से जानती है।
आगे लिखने की हिम्मत नही है, बस इतना ही कहना चाहता हूं कि बाप के लिए बेटी उसकी जिंदगी होती है, पर वो कभी बोलता नहीं और बेटी के लिए बाप दुनिया की सबसे बड़ी हिम्मत और घमंड होता है, पर बेटी भी यह बात कभी किसी को बोलती नहीं है ।।
“समुद्र से भी गहरा है बाप बेटी का प्रेम”
सभी प्यारी बेटियों को सप्रेम समर्पित।
*लेखक सेवानिवृत प्रधानाचार्य होने के अलावा प्रकाण्ड ज्योतिषी व साहित्यकार भी हैं।
