जेएनयू नई दिल्ली के शैक्षिक भ्रमण से लौटे उत्तराखंड के 40 प्राध्यापक, उच्च शिक्षा में गुणवत्ता उन्नयन को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन एवं ज्ञानवर्धन प्रशिक्षण योजना के तहत 13 जिलों के 40 प्राध्यापकों ने किया जेएनयू का अध्ययन दौरा
उत्तराखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत 40 प्राध्यापक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली का शैक्षिक भ्रमण कर लौटे। यह भ्रमण उत्तराखंड सरकार के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन एवं ज्ञानवर्धन प्रशिक्षण योजना के तहत आयोजित किया गया।
यह दौरा 24 मार्च से 29 मार्च 2025 तक चला, जिसे प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धनसिंह रावत ने हरी झंडी दिखाकर देहरादून के राजकीय महाविद्यालय रायपुर से रवाना किया था। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनों की भांति यहां की उच्च शिक्षा को भी समृद्ध और सशक्त बनाना आवश्यक है। उन्होंने प्राध्यापकों को जेएनयू की उच्च शिक्षा प्रणाली को समझने और प्रदेश की जरूरतों के अनुरूप नए तत्वों को शिक्षा में शामिल करने की प्रेरणा दी।
प्रतिभागी प्राध्यापक और विषयवार विवरण
राज्य के 13 जिलों के 117 महाविद्यालयों में से चयनित 40 प्राध्यापक विभिन्न सामाजिक विज्ञान विषयों से संबंधित थे:
- इतिहास: 6
- भूगोल: 6
- अर्थशास्त्र: 2
- राजनीति विज्ञान: 7
- हिंदी: 5
- संस्कृत: 2
- मनोविज्ञान: 1
- शिक्षाशास्त्र: 2
- समाजशास्त्र: 5
- अंग्रेजी: 3
- गृह विज्ञान: 1
उच्च शिक्षा निदेशालय में शिष्टाचार भेंट
शैक्षिक भ्रमण के बाद सभी प्राध्यापकों ने उच्च शिक्षा निदेशालय, हल्द्वानी में निदेशक डॉ. अंजू अग्रवाल से मुलाकात की। इस दौरान अन्य अधिकारीगण—डॉ. आर. एस. भाकुनी, डॉ. हरीश सिंह नयाल और डॉ. गोविंद पाठक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर योजना के नोडल अधिकारी डॉ. प्रकाश लखेड़ा के नेतृत्व में डॉ. रोहित कुमार कांडपाल, डॉ. हेमलता गोस्वामी, डॉ. आशीष अंशु और डॉ. विद्या ने भी शिष्टाचार भेंट की।
सरकारी प्रशंसा और भविष्य की संभावनाएं
नोडल अधिकारी डॉ. प्रकाश लखेड़ा ने मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, विभागीय सचिव, निदेशक, संयुक्त निदेशक, उप निदेशक, सह निदेशक और समस्त प्राचार्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आशा जताई कि इस अध्ययन दौरे से प्राध्यापक नई शिक्षा नीतियों और शिक्षण पद्धतियों को बेहतर ढंग से समझकर उत्तराखंड के उच्च शिक्षा संस्थानों में सकारात्मक बदलाव लाने में सफल होंगे।
