जब मौन बन जाता है साधना और स्नान बनता है मोक्ष का द्वार
माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस नामकरण को लेकर शास्त्रों में दो प्रमुख मान्यताएं प्रचलित हैं।
पहली मान्यता के अनुसार, इस दिन मौन व्रत का पालन करना चाहिए। मुनि शब्द से ही मौनी की उत्पत्ति मानी जाती है। जो साधक इस दिन मौन धारण कर व्रत पूर्ण करता है, वह मुनि-तुल्य हो जाता है।
दूसरी मान्यता यह है कि इस दिन मौन रहकर प्रयाग संगम अथवा किसी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि गंगा का नाम लेकर किया गया जलस्पर्श भी गंगाजल के समान पवित्र हो जाता है।
माघ अमावस्या: युगादि तिथि और अक्षय पुण्य का अवसर
शास्त्रों में कहा गया है—
“माघे पञ्चदशी कृष्णा द्वापरादिः स्मृता बुधैः”
अर्थात माघ कृष्ण पक्ष की अमावस्या को कुछ विद्वान द्वापर युग की आदि तिथि मानते हैं, जबकि कुछ इसे कलियुग की प्रारंभ तिथि भी स्वीकार करते हैं।
युगादि तिथियां अत्यंत शुभ मानी जाती हैं। इस दिन किया गया जप, तप, ध्यान, स्नान, दान, यज्ञ एवं हवन अनेक गुना फल प्रदान करता है।
प्रयाग में तीर्थों का महासंगम
पुराणों में वर्णन आता है—
“दशतीर्थसहस्राणि तिस्रः कोट्यस्तथा पराः।
समागच्छन्ति मध्यां तु प्रयागे भरतर्षभ॥”
अर्थात माघ मास की अमावस्या को प्रयागराज में तीन करोड़ दस हजार तीर्थों का संगम होता है। इस दिन नियमपूर्वक स्नान करने वाला व्यक्ति समस्त पापों से मुक्त होकर पुण्यलोक का अधिकारी बनता है।
रविवासरी मौनी अमावस्या: दुर्लभ संयोग
इस वर्ष मौनी अमावस्या रविवार को पड़ रही है। शास्त्रों के अनुसार रविवासरी अमावस्या में
- सभी जल गंगाजल तुल्य हो जाते हैं
- ब्राह्मण ब्रह्मसंनिभ शुद्धात्मा माने जाते हैं
- अल्प पुण्य भी मेरु पर्वत के समान फलदायी हो जाता है
मौन की महिमा: शास्त्र और संतवाणी
कबीर दास जी कहते हैं—
“बाद विवादे विष घना, बोले बहुत उपाध।
मौन गहै सबको सहै, सुमिरै नाम अगाध॥”
अर्थात विवाद विष समान है, जबकि मौन अमृत है।
शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है—
“मौनेन कलहो नास्ति”
(मौन से कलह का नाश होता है)
दान-पुण्य का विशेष विधान
पुराणों में वर्णित है कि मौनी अमावस्या के दिन—
- तिल, तिल के लड्डू, आंवला, तिल का तेल
- वस्त्र, कम्बल, ईंधन
- गुड़ में काले तिल मिलाकर लाल वस्त्र में बांधकर दान
- भोजन, दक्षिणा एवं पितृ श्राद्ध
करना अत्यंत पुण्यदायी होता है। यह दान न केवल सांसारिक कष्टों से मुक्ति देता है, बल्कि आत्मिक शुद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।
मौन से आत्मबल, दान से करुणा
मौन रहने से आत्मबल की प्राप्ति होती है। यह दिन आत्मावलोकन, संयम और शुभ कर्मों में प्रवृत्त होने का अवसर देता है।
मनु को सृष्टि का नियामक माना गया है और मान्यता है कि मौनी अमावस्या मनु का जन्म दिवस भी है—अर्थात मानव धर्म के मूल संस्कारों की स्मृति का दिन।
आह्वान
आइए, इस मौनी अमावस्या पर—
- मौन व्रत का पालन करें
- यथासंभव पवित्र नदी में स्नान करें
- दान-पुण्य करें
- और ईश्वर से प्रार्थना करें कि
मानव तन पाकर हम मानवोचित कर्म करें,
शुभ कर्मों में संलग्न रहें और आत्मशुद्धि की ओर अग्रसर हों।
सरहद का साक्षी, परिवार की ओर से आप सभी को मौनी अमावस्या की हार्दिक शुभकामनाएं।
♣ प्रस्तुतिः ज्योतिषाचार्य श्री हर्षमणी बहुगुणा
