वन गुज्जर समाज के 'सेला पर्व' पर शिवपुरी में विधिक साक्षरता शिविर एवं वृक्षारोपण, जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड की समस्या उठी
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने वनवासी समुदाय से किया संवाद; ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत लगाए फलदार एवं छायादार पौधे
रिपोर्ट: सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’
शिवपुरी (टिहरी गढ़वाल) | 22 जुलाई 2026 | सरहद का साक्षी, डिजिटल मीडिया
वन, प्रकृति और संस्कृति के साथ गहरे जुड़ाव का प्रतीक वन गुज्जर समाज का पारंपरिक “सेला पर्व” इस वर्ष सामाजिक सरोकारों और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ मनाया गया। उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के निर्देशानुसार तथा जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण टिहरी गढ़वाल श्री नितिन शर्मा के संरक्षण में शिवपुरी में विधिक साक्षरता शिविर एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल कानूनी जागरूकता तक सीमित नहीं था, बल्कि वनवासी समुदाय की समस्याओं को समझना, उनके समाधान की दिशा में पहल करना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को मजबूत करना भी रहा।
वनवासी समाज से सीधा संवाद, समस्याओं को गंभीरता से सुना
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं वरिष्ठ सिविल जज श्री दयाराम ने वन गुज्जर समाज के लोगों के साथ आत्मीय संवाद स्थापित किया। उन्होंने समुदाय के लोगों को उनके संवैधानिक एवं विधिक अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।
श्री दयाराम ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण समाज के प्रत्येक वर्ग को न्याय तक सहज पहुंच उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया कि समुदाय की समस्याओं को गंभीरता से संबंधित विभागों के समक्ष उठाकर उनके समाधान का प्रयास किया जाएगा।
‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत हुआ वृक्षारोपण
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री की प्रेरणा से चलाए जा रहे “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत व्यापक वृक्षारोपण किया गया।
बेमुंडा नर्सरी से प्राप्त फलदार एवं विभिन्न प्रजातियों के छायादार पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। उपस्थित लोगों ने पौधों के संरक्षण का भी संकल्प लिया।
लोक संस्कृति से कराया परिचय
कार्यक्रम में वन गुज्जर समुदाय के लोगों ने अपनी लोकभाषा, पारंपरिक संस्कृति और जीवन शैली से अतिथियों को परिचित कराया। इस अवसर पर समुदाय की सांस्कृतिक विरासत की झलक भी देखने को मिली, जिसने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
वरिष्ठ सिविल जज श्री दयाराम ने बच्चों से भी आत्मीय संवाद कर उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिति की जानकारी प्राप्त की।
जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड की समस्या बनी चिंता
कार्यक्रम के दौरान समुदाय के प्रतिनिधि आमिर आजमा ने वन गुज्जर समाज की प्रमुख समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष रखा।
उन्होंने बताया कि उत्तर भारत क्षेत्र में वन गुज्जर समुदाय की आबादी लगभग चार लाख है। शिवपुरी क्षेत्र में रहने वाले लगभग 100 बच्चों में से 80 बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र नहीं बने हैं, जिसके कारण उनके आधार कार्ड भी नहीं बन पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड के अभाव में बच्चों के विद्यालयों में प्रवेश में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त पेयजल संकट जैसी मूलभूत समस्याओं से भी समुदाय जूझ रहा है।
कानूनी अधिकारों की दी जानकारी
कार्यक्रम में रिटेनर अधिवक्ता राजपाल सिंह मियां ने वन गुज्जर समाज के लोगों को विभिन्न कानूनी प्रावधानों, सरकारी योजनाओं और निःशुल्क विधिक सहायता के अधिकारों की विस्तार से जानकारी दी।
वहीं, जनकवि सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’ ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज, प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं का संदेश देते हुए उपस्थित लोगों को प्रेरित किया।
इनकी रही उपस्थिति
कार्यक्रम में मो. रफी, शमशाद, यूसुफ, गामी, गुड्डी रावत, सरिता कोठियाल, मीना सैनवाल, एस. रावत, मुकेश सहित अधिकार मित्र एवं वन गुज्जर समाज के अनेक लोग उपस्थित रहे।
सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम
शिवपुरी में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक विधिक शिविर नहीं था, बल्कि सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और जनजातीय समुदायों के अधिकारों को एक मंच पर जोड़ने का सार्थक प्रयास भी रहा। वन गुज्जर समाज की वास्तविक समस्याओं को सुनना और उनके समाधान का भरोसा देना इस आयोजन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।
