जनपद टिहरी गढ़वाल में सरस मेले को भव्य और व्यापक स्तर पर आयोजित करने हेतु जिला प्रशासन जुटा तैयारी में, पूर्णानंद स्टेडियम को आयोजन स्थल बनाने की दिशा में निर्देश
टिहरी/दिनांक: 07 अगस्त 2025
जनपद टिहरी गढ़वाल में आगामी “सरस महोत्सव – 2025” के सफल एवं भव्य आयोजन को लेकर जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। इसी क्रम में आज जिला कार्यालय के सभागार में जिलाधिकारी श्रीमती नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में आयोजन की रूपरेखा, विभागीय जिम्मेदारियाँ और वित्तीय संसाधन जुटाने की रणनीतियों पर विशेष चर्चा हुई।
✅ पूर्णानंद स्टेडियम आयोजन स्थल के रूप में होगा तैयार
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि खेल विभाग अक्टूबर माह तक पूर्णानंद स्टेडियम को आयोजन हेतु पूर्णतः तैयार करें, ताकि महोत्सव के लिए उपयुक्त, सुव्यवस्थित और जनसुविधा युक्त स्थल उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने कहा कि सरस महोत्सव न केवल स्थानीय संस्कृति और हस्तशिल्प को मंच प्रदान करता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा देता है।
✅ सीएसआर व निजी सहभागिता से जुटेगा आयोजन हेतु फंड
मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) द्वारा बीडीओ, नगर निकाय अधिकारियों (ईओ) को निर्देशित किया गया कि वे बैंकिंग व होटल उद्योगों से फंड रेजिंग के लिए सक्रिय कदम उठाएं। साथ ही सभी उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) को अपने-अपने क्षेत्रों के होटल व रेस्टोरेंट्स से सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड एकत्र करने हेतु लक्ष्य निर्धारित कर कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।
इस वित्तीय सहभागिता से न केवल आयोजन की भव्यता सुनिश्चित होगी, बल्कि जन-सामान्य की भागीदारी भी बढ़ेगी।
✅ वर्चुअल और भौतिक माध्यम से हुआ समावेशी संवाद
बैठक में एडीएम श्री अवधेश कुमार, पीडी डीआरडीए श्री पुष्पेंद्र सिंह चौहान, डीडीओ श्री मोहम्मद असलम सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे। वहीं, सभी नगर निकाय ईओ एवं एसडीएम वर्चुअल माध्यम से बैठक में सम्मिलित हुए और अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
📌 सरस महोत्सव क्यों है महत्वपूर्ण?
सरस महोत्सव, ग्रामीण उत्पादों, हस्तशिल्प, स्वदेशी उद्यमिता और महिला स्वयं सहायता समूहों को राष्ट्रीय मंच देने वाला एक प्रमुख आयोजन है। यह महोत्सव स्थानीय संस्कृति, शिल्प, खानपान, संगीत और पर्यटन को एक साथ जोड़ने का कार्य करता है। टिहरी जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जनपद में इसका आयोजन, गांव-गांव तक विकास और स्वावलंबन के संदेश को पहुंचाने का माध्यम बनता है।
