स्कूटी आगजनी प्रकरण में भीम आर्मी की एंट्री, कथित जातिसूचक टिप्पणियों पर जताया आक्रोश; पीड़ित परिवार को न्यायिक लड़ाई में साथ देने का ऐलान
नकोट पहुंचे संगठन के पदाधिकारी, बोले—दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई; SSP को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई की उठाई मांग
नकोट, टिहरी गढ़वाल | SKS News
नकोट कस्बे में बीते दिनों घर के समीप खड़ी स्कूटी को अर्द्धरात्रि के दौरान आग के हवाले किए जाने का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। मामले में विभिन्न सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय नागरिकों की सक्रियता बढ़ने लगी है। इसी क्रम में भीम आर्मी संगठन टिहरी गढ़वाल के पदाधिकारी पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और मीडिया से बातचीत करते हुए घटना की कड़ी निंदा की।
संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि प्रकरण से जुड़े कथित लोकगायक द्वारा पीड़ित परिवार की महिला को मोबाइल फोन पर अपमानजनक एवं जातिसूचक शब्द कहे गए, जिससे अनुसूचित जाति समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। संगठन ने ऐसे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की।

भीम आर्मी पदाधिकारियों ने बताया कि वे पूर्व में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) टिहरी गढ़वाल को ज्ञापन सौंपकर मामले की गहन जांच एवं दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग कर चुके हैं।
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पीड़ित परिवार के मुखिया वीरेन्द्र सिंह नेगी एवं उनकी धर्मपत्नी रोशनी देवी से मुलाकात कर संगठन ने उन्हें हरसंभव न्यायिक सहयोग का आश्वासन दिया। संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि न्याय मिलने तक वे पीड़ित परिवार के साथ खड़े रहेंगे और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए लगातार आवाज उठाते रहेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में अनावश्यक विलंब हुआ अथवा दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन आगे व्यापक आंदोलन की रणनीति पर विचार कर सकता है।
इस दौरान नकोट क्षेत्र सहित आसपास के कई गांवों से पहुंचे नागरिकों, महिलाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी घटना पर चिंता व्यक्त की। जिला पंचायत सदस्य ताजबीर खाती ने भी मौके पर पहुंचकर घटना की भर्त्सना करते हुए दोषियों को शीघ्र न्यायिक प्रक्रिया के तहत दंडित किए जाने की मांग की।
Editor’s Desclaimer:
इस प्रकरण में लगाए गए आरोप संबंधित पक्षों के कथनों पर आधारित हैं। आरोपों की सत्यता की पुष्टि पुलिस जांच एवं विधिक प्रक्रिया के उपरांत ही हो सकेगी। किसी भी व्यक्ति को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता जब तक सक्षम न्यायिक अथवा जांच एजेंसी द्वारा तथ्य स्थापित न कर दिए जाएं।
