हिमालय प्रहरी सम्मान-2026 से सम्मानित हुए चिपको आंदोलन के साइलेंट वर्कर दयाल भाई, पर्यावरण संरक्षण को समर्पित जीवन को मिला सम्मान
स्व. सुंदरलाल बहुगुणा की स्मृति में दयाल भाई भंडारी और कमला पाठक को मिला ‘हिमालय प्रहरी सम्मान’, हेंवल घाटी की पर्यावरण चेतना को किया गया नमन
चंबा/बुरांशबाड़ी, टिहरी गढ़वाल। रिपोर्ट: सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’
हिमालय केवल बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं का नाम नहीं है, बल्कि वह उन लोगों की तपस्या, त्याग और संघर्ष का भी प्रतीक है जिन्होंने प्रकृति को बचाने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। ऐसे ही एक निस्वार्थ पर्यावरण प्रहरी हैं दयाल भाई (भंडारी), जिन्हें इस वर्ष प्रतिष्ठित “हिमालय प्रहरी सम्मान-2026” से सम्मानित किया गया है।
पद्म विभूषण स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा की स्मृति में स्थापित यह सम्मान प्रत्येक वर्ष उन व्यक्तित्वों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति संवर्धन और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। वर्ष 2026 का यह सम्मान दयाल भाई भंडारी और कमला पाठक को प्रदान किया गया।
चिपको आंदोलन के अनसुने नायक हैं दयाल भाई
दयाल भाई उन विरले व्यक्तित्वों में शामिल हैं जिन्होंने कभी मंच, प्रसिद्धि या प्रचार की इच्छा नहीं की। वे चिपको आंदोलन के उन साइलेंट वर्कर्स में रहे, जिन्होंने स्व. सुंदरलाल बहुगुणा के साथ अनेक पदयात्राओं, खनन विरोधी आंदोलनों, नशा मुक्ति अभियानों तथा पर्यावरण संरक्षण के संघर्षों में सक्रिय भूमिका निभाई।
उनका संपूर्ण जीवन प्रकृति, समाज और मानवता के लिए समर्पित रहा है। आज भी उनके विचारों और जीवनशैली में वही सादगी, वही प्रतिबद्धता और वही संघर्षशीलता दिखाई देती है, जिसने कभी हिमालयी आंदोलनों को नई दिशा दी थी।
हेंवल घाटी: जन आंदोलनों और पर्यावरण चेतना की धरती
कुजणी पट्टी और हेंवल घाटी को सामाजिक आंदोलनों की जननी कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। यही वह भूमि है जहां स्व. आचार्य गोपेश्वर प्रसाद कोठियाल, आलोक प्रभाकर, धूम सिंह नेगी, कुंवर प्रसून, प्रताप शिखर, बचनी देवी, सोबत भंडारी, दुलारी देवी, रघु भाई जड़धारी, विजय जड़धारी, अरण्य रंजन और महेश लखेड़ा जैसे अनेक समाजसेवियों और पर्यावरण प्रेमियों ने जनचेतना की अलख जगाई।
इन सभी को स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा के विचारों और संघर्षों का सान्निध्य प्राप्त हुआ, जिसने उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण को जनांदोलन का स्वरूप दिया।
लेखक, पत्रकार और चिंतकों ने भी निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
पर्यावरण संरक्षण के इस आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने में साहित्यकारों, पत्रकारों और रचनाकारों का भी बड़ा योगदान रहा। उस दौर में दिनमान टाइम्स और युगवाणी जैसे प्रकाशनों ने पर्यावरणीय आंदोलनों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज भले ही उस पीढ़ी के अधिकांश आंदोलनकारी इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, संघर्ष और योगदान आज भी समाज को प्रेरित कर रहे हैं।
दयाल भाई से मुलाकात बनी प्रेरणा
चंबा में दयाल भाई से हुई मुलाकात के दौरान पर्यावरण, समाज और उत्तराखंड के भविष्य को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनके भीतर वही ऊर्जा, वही स्पष्टता और वही सामाजिक सरोकार दिखाई दिए, जो उनके युवा दिनों की पहचान रहे हैं।
उनकी सादगी और विचारशीलता आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। वे सर्वोदय विचारधारा के समर्थक हैं और समरस समाज के निर्माण में विश्वास रखते हैं।
सुंदरलाल बहुगुणा की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं उनके पुत्र
इस अवसर पर स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा के पुत्र राजीव बहुगुणा एवं प्रदीप बहुगुणा द्वारा पर्यावरण एवं सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की गई।
उल्लेखनीय है कि 21 मई 2026 को संस्कृति विभाग के प्रेक्षागृह, देहरादून में आयोजित समारोह में दयाल भाई एवं कमला पाठक को “हिमालय प्रहरी सम्मान-2026” से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार कमर वहीद नकवी थे, जबकि अध्यक्षता स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र डोभाल ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में कर्नल अजय कोठियाल एवं प्रो. गोबिंद सिंह उपस्थित रहे।
श्रीदेव सुमन को बताया गांधी से भी प्रखर विचारों वाला व्यक्तित्व
बातचीत के दौरान दयाल भाई ने अमर शहीद श्रीदेव सुमन को याद करते हुए कहा कि उनकी विचारधारा कई मायनों में महात्मा गांधी से भी अधिक प्रखर और त्यागमयी थी।
उन्होंने कहा,
“मेरी जानकारी में श्रीदेव सुमन जैसा महान व्यक्तित्व आज तक पैदा नहीं हुआ, जिसने मानवता, समाज सेवा और जन अधिकारों के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया हो।”
उनके इन शब्दों ने उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया और एक बार फिर यह एहसास कराया कि उत्तराखंड की धरती त्याग, संघर्ष और जनसेवा की अद्भुत परंपराओं से समृद्ध रही है।
पर्यावरण दिवस और बीज बचाओ आंदोलन पर भी चर्चा
दयाल भाई ने बताया कि 31 मई को पिपलेश्वर महादेव (मांडई) नागणी में बीज बचाओ आंदोलन के प्रणेता विजय जड़धारी के आह्वान पर एक महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। साथ ही 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर खाड़ी क्षेत्र में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
आज जब पर्यावरण संरक्षण केवल चर्चा का विषय बनकर रह गया है, ऐसे समय में दयाल भाई जैसे कर्मयोगियों का सम्मान वास्तव में उन मूल्यों का सम्मान है, जिन्होंने हिमालय और प्रकृति की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
