गांव की विनीता ने पहाड़ी शैंपू–साबुन से बदल दी जिंदगी, अब 15 महिलाओं को भी दे रहीं रोजगार
रीप योजना का बड़ा असर: विनीता नौटियाल ने बनाया हर्बल ब्रांड, 60 हज़ार मासिक कमाई
प्याज शैंपू और हल्दी साबुन ने बदली किस्मत, विनीता नौटियाल बनीं ग्रामीण महिला उद्यमिता की मिसाल
टिहरी की विनीता नौटियाल ने बनाया पहाड़ी शैंपू और साबुन ब्रांड, हर महीने कमा रही ₹60 हज़ार
रीप परियोजना से मैंडखाल बाजार में खोली रिटेल शॉप, प्याज शैंपू और हर्बल साबुन की बढ़ी मांग, 15 महिलाओं को भी मिला रोजगार
टिहरी गढ़वाल, 17 अगस्त 2025
“जहां चाह, वहां राह”—इस कहावत को सच कर दिखाया है टिहरी गढ़वाल की विनीता नौटियाल ने।
थौलधार ब्लॉक के ग्राम बंस्युल निवासी विनीता नौटियाल ने पहाड़ी शैंपू, हल्दी–भीमल साबुन और वाशिंग पाउडर बनाकर न सिर्फ आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बनी हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार की रीप (Rural Enterprise Acceleration Project) योजना का लाभ लेकर उन्होंने मंडखाल बाजार में रिटेल शॉप शुरू की। यहां हर्बल प्रोडक्ट्स के साथ खाद्य पदार्थ भी बेचे जाते हैं। इस प्रयास से वे आज हर महीने ₹50–60 हज़ार की आय कमा रही हैं। साथ ही 12–15 ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देकर स्वावलंबन की नई कहानी लिख रही हैं।
प्याज शैंपू सबसे लोकप्रिय
विनीता नौटियाल के अनुसार उनके समूह द्वारा तैयार प्याज का शैंपू सबसे अधिक बिकने वाला प्रोडक्ट है। काले और घने बालों के लिए यह बेहद उपयोगी है।
- प्याज शैंपू (200ml) – ₹200
- भीमल शैंपू – ₹150
- हर्बल साबुन (एलोवेरा व हल्दी) – ₹50–70
- वाशिंग पाउडर – ₹100 प्रति किलो
योजनाओं से मिला सहारा
विनीता नौटियाल लंबे समय से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ी रही हैं। वर्ष 2023-24 में उन्होंने रीप परियोजना के तहत व्यक्तिगत उद्यम (गैर कृषि व्यवसाय) के लिए प्रस्ताव दिया।
- विभागीय अंशदान : ₹75,000
- बैंक लोन : ₹1,25,000
- स्वयं का निवेश : ₹53,400
- कुल लागत : ₹2,53,400
महिलाओं को रोजगार का अवसर
विनीता की पहल से गांव की 12–15 महिलाएं भी रोजगार से जुड़ गई हैं। ये महिलाएं शैंपू, साबुन और वाशिंग पाउडर बनाने के कार्य में सहयोग करती हैं और नियमित वेतन प्राप्त करती हैं।
आत्मनिर्भरता की मिसाल
विनीता नौटियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की योजनाओं से ग्रामीण महिलाओं को आजीविका सुधार और आत्मनिर्भरता का नया मार्ग मिला है।
