मुख्यमंत्री के विज़न ने दिखाई नई राह, 23 वर्षीय युवा बना रिवर्स माइग्रेशन की जीवंत मिसाल
अलमस, टिहरी | 11 जनवरी 2026
उत्तराखंड के पर्वतीय गांवों से शहरों की ओर पलायन लंबे समय से एक जटिल सामाजिक समस्या रही है। बेहतर रोजगार और भविष्य की तलाश में गांव खाली होते चले गए। लेकिन इसी उत्तराखंड की पहाड़ियों से अब रिवर्स माइग्रेशन की नई कहानी भी जन्म ले रही है—एक ऐसी कहानी, जो नीतियों, परिश्रम और दूरदर्शी सोच के संगम से लिखी जा रही है।
जनपद टिहरी गढ़वाल के विकासखंड जौनपुर अंतर्गत ग्राम अलमस के निवासी सतीश पंवार (23 वर्ष) इसी बदलती तस्वीर का सशक्त उदाहरण हैं।
शहर नहीं, गांव चुना—और बदल दी सोच
जहां अधिकांश युवा शहरों में नौकरी की तलाश को ही सफलता का पैमाना मानते हैं, वहीं सतीश पंवार ने गांव में रहकर कुछ अलग करने का निर्णय लिया। उन्होंने खेती को परंपरा नहीं, आधुनिक उद्यम के रूप में अपनाया।
उनका यह निर्णय केवल व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि यह उस भरोसे का परिणाम था, जो राज्य सरकार की एप्पल मिशन योजना ने युवाओं के भीतर जगाया।
एप्पल मिशन: एक योजना, जिसने आत्मविश्वास दिया
वर्ष 2021–22 में सतीश पंवार एप्पल मिशन से जुड़े। योजना के अंतर्गत उन्हें
- 530 सेब के पौधों पर 80% अनुदान,
- 20% लाभांश सहायता,
- आधुनिक बागवानी का व्यावहारिक प्रशिक्षण,
- तथा जिला उद्यान विभाग का तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
इस सहयोग से सतीश ने अपनी 10 नाली भूमि में वैज्ञानिक पद्धति से सेब का बाग तैयार किया—जो आज उनकी पहचान बन चुका है।
उन्नत किस्में, वैज्ञानिक पद्धति और बेहतर उत्पादन
सतीश ने पारंपरिक किस्मों के बजाय उन्नत प्रजातियों का चयन किया। उनके बाग में M9 Kingroot, Greensmeet, Adam, Jeromine और Redblocks जैसी आधुनिक सेब किस्में रोपी गईं।
परिणामस्वरूप, वर्तमान वर्ष में उन्हें 14–15 क्विंटल सेब का उत्पादन प्राप्त हुआ, जिससे लगभग ₹2 से ₹2.50 लाख की आय हुई। यह आय न केवल आर्थिक मजबूती का संकेत है, बल्कि यह साबित करती है कि पहाड़ों में भी कृषि लाभ का माध्यम बन सकती है—यदि सही तकनीक और नीति का साथ मिले।
स्थानीय उत्पाद, प्रतिष्ठित बाजार
सतीश के सेब केवल स्थानीय हाट-बाजार तक सीमित नहीं हैं। उनके उत्पादों की आपूर्ति
मसूरी क्षेत्र के प्रतिष्ठित संस्थानों—जैसे Woodstock School और St. George’s College—के साथ-साथ स्थानीय बाजारों में भी की जा रही है।
इससे उन्हें स्थायी और भरोसेमंद बाजार मिला, जो किसी भी उद्यम की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी होता है।
सोशल मीडिया से सीधा संवाद
सतीश आधुनिक समय की मांग को भी समझते हैं। उन्होंने फेसबुक पर “Family Farm” नाम से पेज बनाकर अपने उत्पादों का प्रचार-प्रसार शुरू किया। इस डिजिटल जुड़ाव से वे सीधे उपभोक्ताओं से संवाद कर पा रहे हैं—बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई और ब्रांड वैल्यू बढ़ी।
केवल रोजगार नहीं, एक प्रेरणा
जिला उद्यान अधिकारी अरविंद शर्मा के अनुसार, सतीश पंवार ने एप्पल मिशन के अंतर्गत जो कार्य किया है, वह अन्य युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री एवं जिलाधिकारी के निर्देशन में संचालित एप्पल मिशन, कीवी मिशन और ड्रैगन फ्रूट मिशन से जुड़ने वाले युवाओं को विभाग द्वारा हर संभव तकनीकी और संस्थागत सहयोग दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के विज़न की जमीन पर उतरती तस्वीर
सतीश पंवार की सफलता उस नीति-विज़न को धरातल पर उतारती है, जिसमें राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने युवाओं को गांव में ही
- रोजगार,
- आधुनिक बागवानी,
- और आर्थिक आत्मनिर्भरता
से जोड़ने का संकल्प लिया है।
यह कहानी बताती है कि यदि नीति सही दिशा में हो और युवा उसे अपनाने का साहस करें, तो गांव केवल निवास स्थान नहीं, बल्कि आर्थिक समृद्धि का केंद्र भी बन सकता है।
अलमस से उठती नई उम्मीद
ग्राम अलमस का यह युवा आज केवल अपने परिवार का सहारा नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक संदेश है—
गांव में रहकर भी सपने पूरे किए जा सकते हैं। सतीश पंवार की सफलता यह सिद्ध करती है कि उत्तराखंड के पहाड़ अब केवल पलायन की कहानियों के लिए नहीं, बल्कि संभावनाओं के नए अध्याय लिखने के लिए तैयार हैं।
