जल स्रोतों की मैपिंग, वन पंचायतों की भागीदारी और ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन रिवर’ अभियान पर विशेष फोकस, जिला समन्वय समिति एवं DLEC की बैठक संपन्न
टिहरी में जल संरक्षण एवं जलवायु अनुकूल कृषि पर जोर, डीएम नितिका खण्डेलवाल ने दिए समन्वित कार्ययोजना के निर्देश
टिहरी गढ़वाल, 10 जून 2026 | SKS News
जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में जिला समन्वय समिति एवं SARRA की जिला स्तरीय कार्यकारी समिति (DLEC) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन, जलवायु अनुकूल कृषि तथा ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के सतत विकास से संबंधित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई।
बैठक में जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल ने निर्देश दिए कि जनपद में ऐसे सभी जल स्रोतों की भी मैपिंग की जाए, जिनमें पूर्व में जल उपलब्ध था, ताकि उनकी वर्तमान स्थिति का आकलन कर पुनर्जीवन की कार्ययोजना बनाई जा सके। उन्होंने वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने तथा उसमें वन पंचायतों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (NIH) द्वारा उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट का गहन अध्ययन कर उपयोगी जानकारियों को योजनाओं में शामिल करने को कहा।
मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल ने निर्देश दिए कि प्रत्येक ग्राम पंचायत का एक ‘वन-पेजर’ तैयार किया जाए, जिसमें बंजर भूमि, कृषि योग्य भूमि, सिंचित क्षेत्र, निर्धारित अवधि में किए गए कार्यों का प्रभाव तथा प्राप्त परिणामों का स्पष्ट विवरण दर्ज हो। इससे योजनाओं की प्रगति और उपलब्धियों का प्रभावी मूल्यांकन किया जा सकेगा।
बैठक में उप निदेशक सर्वेश्वर ने जल संरक्षण अभियान की रणनीति पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि अभियान के अंतर्गत जनभागीदारी को बढ़ावा देने, सूखते जल स्रोतों, सहायक नदियों एवं धाराओं के पुनर्जीवन, जलागम क्षेत्रों के उपचार तथा भागीरथी मोबाइल ऐप के माध्यम से चिन्हित जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक महत्व वाले धारे-नालों के जीर्णोद्धार तथा ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन रिवर’ अभियान के तहत चयनित नदियों और उनकी सहायक धाराओं के संरक्षण एवं उपचार के लिए भी व्यापक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
बैठक में विश्व बैंक वित्तपोषित उत्तराखंड जलवायु अनुकूलीकरण बरानी कृषि परियोजना की कार्ययोजना एवं प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य चयनित सूक्ष्म जलागम क्षेत्रों में पर्वतीय कृषि को अधिक लाभकारी, जलवायु अनुकूल एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाना है, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाई जा सके।
परियोजना के प्रदर्शन सूचकों की जानकारी देते हुए बताया गया कि कृषि भूमि क्षेत्रों से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 5 प्रतिशत की कमी, लक्षित फसलों की उत्पादकता में 20 प्रतिशत की वृद्धि, लक्षित स्प्रिंगशेड क्षेत्रों में जल उपलब्धता में 30 प्रतिशत की वृद्धि तथा कृषक परिवारों की कृषि आधारित आय में 25 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य प्राप्त किया गया है।
बैठक में डीएफओ संदीपा शर्मा, हिम्मोथन सोसाइटी से दर्शन सिंह एवं दुर्गा प्रसाद, लघु सिंचाई विभाग से डी.सी. मिश्रा, कृषि विज्ञान केंद्र से डॉ. आलोक येवले, ग्रामीण विकास विभाग से महाबीर सिंह एवं रोशन लाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
