टिहरी मेडिकल कॉलेज पर सियासत या समाधान? अब मुख्यमंत्री धामी के फैसले पर टिकी उम्मीदें
संपादकीय
टिहरी मेडिकल कॉलेज पर सियासत या समाधान? अब मुख्यमंत्री धामी के फैसले पर टिकी उम्मीदें
लेखक: केदार सिंह चौहान ‘प्रवर’
संपादक एवं प्रकाशक, सरहद का साक्षी डिजिटल मीडिया
टिहरी की जनता का वर्षों पुराना सपना
उत्तराखण्ड के पर्वतीय जनपद टिहरी गढ़वाल में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की मांग कोई नई नहीं है। वर्षों से क्षेत्रवासी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और विभिन्न मंच इस मांग को उठाते रहे हैं। इसका उद्देश्य केवल एक भवन का निर्माण नहीं, बल्कि पहाड़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा देना, युवाओं को चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराना और क्षेत्रीय विकास को गति देना है।
लेकिन हाल के दिनों में यह जनहित का विषय राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के संभावित स्थान को लेकर दो वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों—कैबिनेट मंत्री एवं नरेंद्रनगर विधायक सुबोध उनियाल तथा टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय—के बीच अलग-अलग दावे और सार्वजनिक बयान सामने आए। परिणामस्वरूप मूल मुद्दा, अर्थात् मेडिकल कॉलेज की स्थापना, राजनीतिक विमर्श में उलझता दिखाई देने लगा।
जब विकास का मुद्दा राजनीति में बदलने लगे…
लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं। जनप्रतिनिधियों का अपने-अपने क्षेत्र के हित में पक्ष रखना भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। किंतु जब विकास की परियोजनाएं राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का माध्यम बनने लगें, तब जनता के मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि कहीं निर्णय प्रक्रिया प्रभावित तो नहीं होगी।
टिहरी मेडिकल कॉलेज का मुद्दा भी कुछ ऐसा ही प्रतीत होने लगा था। एक ओर अलग-अलग क्षेत्रों से मेडिकल कॉलेज अपने यहां स्थापित किए जाने की मांग उठ रही है, तो दूसरी ओर विभिन्न जनप्रतिनिधि अपने-अपने तर्कों के साथ सामने हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि मेडिकल कॉलेज किस विधानसभा क्षेत्र में बनेगा, बल्कि यह है कि वह जनहित, भौगोलिक उपयुक्तता, पहुंच, भविष्य की आवश्यकताओं और तकनीकी मानकों के आधार पर कहां अधिक उपयोगी सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री की बैठक: एक बड़ा राजनीतिक संदेश
शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोनों जनप्रतिनिधियों को एक साथ मुख्यमंत्री आवास बुलाकर जिस प्रकार बैठक की, उसने कई राजनीतिक संदेश दिए।
यह बैठक केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं दिखी। इसके माध्यम से यह संकेत भी गया कि राज्य सरकार इस विषय को राजनीतिक विवाद नहीं बनने देना चाहती। बैठक में मेडिकल कॉलेज स्थापना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई और मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार है।
यह संदेश महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि विकास परियोजनाओं पर सार्वजनिक टकराव से निवेश, प्रशासनिक प्रक्रिया और जनता का विश्वास प्रभावित होता है। मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप इस दृष्टि से संतुलनकारी कदम माना जा सकता है।
जनता की आवाज़ भी हो रही है मुखर
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है।
नरेन्द्रनगर विधानसभा क्षेत्र के फिपल्टी–पलाम (झाबर) क्षेत्र के पक्ष में स्थानीय जनता, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी संगठित रूप से अपनी आवाज बुलंद की है।
हाल ही में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में सार्वजनिक बैठकों का आयोजन हुआ और 37 सदस्यीय जनसहयोग मंच की अंतरिम समिति का गठन भी किया गया। इससे स्पष्ट है कि यह विषय केवल राजनीतिक प्रतिनिधियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम जनता भी अपनी भागीदारी दर्ज करा रही है।
लोकतंत्र में जनमत का महत्व सर्वोपरि है। इसलिए शासन के लिए आवश्यक होगा कि वह सभी पक्षों को सुनते हुए निष्पक्ष निर्णय प्रक्रिया अपनाए।
निर्णय का आधार क्या होना चाहिए?
मेडिकल कॉलेज जैसी बड़ी परियोजना का निर्णय केवल राजनीतिक आग्रह के आधार पर नहीं हो सकता।
निर्णय लेते समय निम्न बिंदुओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए—
- भूमि की उपलब्धता एवं उपयुक्तता
- भू-वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय स्थिति
- सड़क एवं परिवहन संपर्क
- भविष्य में विस्तार की संभावनाएं
- आपदा प्रबंधन की दृष्टि से सुरक्षा
- पूरे जनपद एवं गढ़वाल मंडल के लोगों की पहुंच
- विशेषज्ञ संस्थाओं एवं तकनीकी एजेंसियों की रिपोर्ट
- वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवहार्यता
यदि निर्णय इन मानकों के आधार पर होगा तो वह लंबे समय तक विवादों से भी मुक्त रहेगा।
स्वास्थ्य व्यवस्था का बड़ा सवाल
उत्तराखण्ड का पर्वतीय भूभाग आज भी स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों से जूझ रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, गंभीर मरीजों को देहरादून या ऋषिकेश रेफर करने की मजबूरी, लंबी दूरी और समय की बाधाएं आज भी आम लोगों के सामने हैं। ऐसे में टिहरी मेडिकल कॉलेज केवल चिकित्सा शिक्षा का संस्थान नहीं होगा, बल्कि—
- आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा केंद्र बनेगा।
- विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी।
- स्थानीय युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के अवसर मिलेंगे।
- रोजगार एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
- पूरे गढ़वाल क्षेत्र को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
क्या अब विवाद समाप्त होगा?
मुख्यमंत्री की पहल के बाद यह अपेक्षा की जा रही है कि राजनीतिक बयानबाजी की बजाय अब तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
यदि सरकार सभी पक्षों से सुझाव लेकर निष्पक्ष निर्णय करती है तो यह केवल एक मेडिकल कॉलेज की स्थापना नहीं होगी, बल्कि यह संदेश भी जाएगा कि उत्तराखण्ड में विकास के मुद्दे राजनीतिक विवादों से ऊपर हैं।
जनता की अपेक्षा
टिहरी की जनता वर्षों से केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम चाहती है।
जनता यह भी चाहती है कि—
- निर्णय शीघ्र हो।
- पारदर्शिता बनी रहे।
- तकनीकी मानकों से समझौता न हो।
- किसी भी क्षेत्र के साथ अन्याय की भावना न बने।
- मेडिकल कॉलेज का निर्माण समयबद्ध तरीके से पूरा हो।
निष्कर्ष:
टिहरी मेडिकल कॉलेज का मुद्दा अब केवल स्थान चयन का प्रश्न नहीं रह गया है। यह उत्तराखण्ड की स्वास्थ्य नीति, क्षेत्रीय संतुलन और विकास की दिशा से जुड़ा विषय बन चुका है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा दोनों प्रमुख जनप्रतिनिधियों को साथ बैठाकर संवाद स्थापित करना सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। अब राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि वह सभी पक्षों, विशेषज्ञों और स्थानीय अपेक्षाओं का संतुलित आकलन करते हुए ऐसा निर्णय ले, जो लंबे समय तक जनहित में उदाहरण बन सके।
राजनीति समय के साथ बदलती रहती है, लेकिन अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य संस्थान आने वाली पीढ़ियों की धरोहर बनते हैं। इसलिए अपेक्षा यही है कि अंतिम निर्णय राजनीति नहीं, बल्कि जनहित, वैज्ञानिक मानकों और उत्तराखण्ड के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह संपादकीय उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं, जनप्रतिनिधियों के बयानों तथा वर्तमान घटनाक्रम के विश्लेषण पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, राजनीतिक दल अथवा संस्था का समर्थन या विरोध करना नहीं है। लेख में व्यक्त विचार संपादकीय विश्लेषण हैं। मेडिकल कॉलेज की स्थापना संबंधी अंतिम निर्णय उत्तराखण्ड सरकार एवं संबंधित सक्षम प्राधिकारियों द्वारा तकनीकी, प्रशासनिक, वित्तीय तथा विधिक मानकों के आधार पर लिया जाएगा। पाठकों से अपेक्षा है कि वे इस लेख को एक निष्पक्ष विमर्श के रूप में देखें, न कि किसी आधिकारिक घोषणा या अंतिम तथ्यात्मक निष्कर्ष के रूप में।
