डिग्री के साथ कौशल और सही कैरियर मार्गदर्शन जरूरी: प्राचार्य डॉ. डी.एस. नेगी
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार में एक दिवसीय कैरियर काउंसलिंग सत्र आयोजित, विद्यार्थियों को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों की दी जानकारी
कोटद्वार। कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग, क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय लैंसडाउन तथा कैरियर परामर्श प्रकोष्ठ, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय में एक दिवसीय कैरियर काउंसलिंग सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) डी.एस. नेगी के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) डी.एस. नेगी, कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी, लैंसडाउन गढ़वाल अजय सिंह तथा महाविद्यालय के एनसीसी अधिकारी डॉ. विनोद सिंह भंडारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
केवल डिग्री रोजगार की गारंटी नहीं
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो. (डॉ.) डी.एस. नेगी ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी दौर में केवल डिग्री हासिल कर लेना रोजगार की गारंटी नहीं है। विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए रोजगारपरक कौशल, तकनीकी ज्ञान, व्यावहारिक दक्षता और आत्मविश्वास से परिपूर्ण होना आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी रुचि और क्षमताओं को पहचानकर स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने तथा उसे हासिल करने के लिए निरंतर सीखते रहने का आह्वान किया।
प्राचार्य ने कहा कि आज शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास और सही कैरियर मार्गदर्शन का महत्व तेजी से बढ़ा है। प्रत्येक विद्यार्थी में असीम संभावनाएं होती हैं, आवश्यकता केवल उन संभावनाओं को पहचानकर सही दिशा में आगे बढ़ने की है।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप कैरियर का चुनाव करने और आत्मविश्वास, अनुशासन तथा निरंतर मेहनत के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
सेवायोजन अधिकारी ने बताए कैरियर के अवसर
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी लैंसडाउन गढ़वाल अजय सिंह ने छात्र-छात्राओं को विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध कैरियर अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने रोजगार की संभावनाओं के साथ-साथ विभिन्न विभागीय पोर्टल, सेवायोजन से संबंधित ऑनलाइन सुविधाओं एवं सरकारी योजनाओं के बारे में भी विद्यार्थियों को अवगत कराया।
उन्होंने विद्यार्थियों से उपलब्ध अवसरों का सही समय पर उपयोग करने तथा रोजगार की तैयारी के साथ-साथ अपने कौशल को लगातार विकसित करने का आह्वान किया।
लक्ष्य तय कर मेहनत करने की सलाह
महाविद्यालय के एनसीसी अधिकारी डॉ. विनोद सिंह भंडारी ने भी विद्यार्थियों को बेहतर कैरियर चयन के संबंध में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए स्पष्ट लक्ष्य, अनुशासन, नियमित अभ्यास और कठिन परिश्रम आवश्यक हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी क्षमताओं का आकलन कर उसी के अनुरूप कैरियर विकल्प चुनने तथा लक्ष्य प्राप्ति के लिए योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने का आह्वान किया।
विशेषज्ञों और विद्यार्थियों के बीच संवाद
कार्यक्रम का संचालन कैरियर परामर्श प्रकोष्ठ की संयोजक डॉ. मनीषा सिंह ने किया। उन्होंने विशेषज्ञों और छात्र-छात्राओं के बीच सार्थक संवाद स्थापित करते हुए विद्यार्थियों की कैरियर संबंधी जिज्ञासाओं को सामने रखा।
काउंसलिंग सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास और कैरियर विकल्पों से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम के अंत में कैरियर काउंसलिंग समिति की सदस्य डॉ. ऐश्वर्या राणा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले अतिथियों, विशेषज्ञों, प्राचार्य, प्राध्यापकों एवं छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में कैरियर काउंसलिंग समिति के सदस्य डॉ. गणेश चंद, डॉ. हिमांशु, डॉ. गीता एवं डॉ. भुवनेश कुमार का विशेष योगदान रहा।
इस अवसर पर डॉ. आशाराम बिजल्वाण, डॉ. संदीप कुमार, डॉ. संजय मदान, डॉ. मीनाक्षी वर्मा, क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय लैंसडाउन के नीरज सिंह रावत, नगर सेवायोजन कार्यालय पौड़ी के प्रभात सिंह नेगी, शिक्षण एवं मार्गदर्शन केंद्र कोटद्वार के विकास नेगी सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक, कर्मचारी, एनसीसी कैडेट्स एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
संपादकीय दृष्टि से महत्वपूर्ण संदेश
यह कैरियर काउंसलिंग कार्यक्रम वर्तमान समय की उस आवश्यकता को रेखांकित करता है, जिसमें उच्च शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को कौशल, रोजगार बाजार की समझ, डिजिटल दक्षता और व्यावहारिक प्रशिक्षण से जोड़ना जरूरी हो गया है। महज प्रमाणपत्र और डिग्री के बजाय विद्यार्थी यदि अपनी रुचि, क्षमता और रोजगार की बदलती मांग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करें, तो उनके लिए रोजगार एवं स्वरोजगार दोनों के अवसर व्यापक हो सकते हैं।
