देवप्रयाग: अरण्यक गौशाला में निराश्रित गौवंशों के साथ मनाई गई होली
गौसेवकों ने रंग-गुलाल लगाकर मनाया रंगों का पर्व, लगभग 170 गौवंशों का हो रहा पालन-पोषण
देवप्रयाग।
होली के पावन पर्व पर सेवा और संवेदना की अनूठी मिसाल देखने को मिली, जब अरण्यक जन सेवा संस्था द्वारा संचालित अरण्यक गौशाला, ग्राम बागी (देवप्रयाग) में निराश्रित गौवंशों के साथ रंगों का त्योहार मनाया गया।
इस अवसर पर गौसेवकों और गौशाला प्रबंधन से जुड़े सदस्यों ने गौवंशों को रंग-गुलाल लगाकर होली की खुशियां साझा कीं और उनके लिए विशेष चारे व देखभाल की व्यवस्था भी की।
लगभग 170 निराश्रित गौवंशों की हो रही सेवा
संस्था द्वारा देवप्रयाग और कीर्तिनगर क्षेत्र में निराश्रित गौवंशों के संरक्षण के उद्देश्य से गौशाला संचालित की जा रही है। वर्तमान में गौशाला में लगभग 170 निराश्रित गौवंशों का पालन-पोषण किया जा रहा है।
संस्था के सदस्य निरंतर सेवा भाव से इन गौवंशों की देखभाल, भोजन, उपचार और आश्रय की व्यवस्था में जुटे रहते हैं।
गौसेवकों ने मनाई सेवा भाव की होली
होली के पावन अवसर पर गौशाला प्रबंधक इंद्र दत्त रतूड़ी के नेतृत्व में गौसेवकों ने गौवंशों के साथ होली मनाई। इस दौरान गौसेवक अनिल गिरी, गब्बर सिंह, सरिता देवी और अनूप भट्ट भी उपस्थित रहे।
सभी ने मिलकर गौवंशों के माथे पर गुलाल लगाया और उनके लिए हरे चारे तथा विशेष आहार की व्यवस्था की। इस दौरान वातावरण में सेवा, श्रद्धा और आनंद का भाव दिखाई दिया।
सेवा और संवेदना का संदेश
गौसेवकों ने बताया कि होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और सेवा का संदेश देने वाला त्योहार भी है। निराश्रित गौवंशों के साथ यह पर्व मनाकर समाज को यह संदेश दिया गया कि पशुओं की सेवा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी मानव सेवा।
