निजी विद्यालयों में भी लागू होगी ‘हमारी विरासत एवं विभूतियां’ पुस्तक: डॉ. धन सिंह रावत
बच्चों के बस्ते का बोझ कम होगा, माह में एक दिन ‘बैग फ्री डे’ रहेगा, निजी और सरकारी स्कूलों में ‘टीचिंग शेयरिंग प्रोग्राम’ भी होगा शुरू।
देहरादून, 9 मार्च 2025:
उत्तराखंड में निजी विद्यालयों में भी अब राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विभूतियों को पढ़ाने के लिए तैयार की गई ‘हमारी विरासत एवं विभूतियां’ पुस्तकें शामिल की जाएंगी। यह निर्णय राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) द्वारा तैयार इन पुस्तकों को निजी विद्यालयों में लागू करने की पहल के तहत लिया गया है। प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस अहम कदम की जानकारी देते हुए बताया कि अप्रैल 2025 से इस योजना की विधिवत शुरुआत की जाएगी।
बैग फ्री डे और बस्ते का भार कम करने की पहल
डॉ. रावत ने घोषणा की कि प्रदेश के निजी विद्यालयों में बच्चों के बस्तों का भार कम करने के उद्देश्य से प्रत्येक माह में एक दिन ‘बैग फ्री डे’ मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई से तनाव मुक्त करना और उन्हें नई शिक्षण विधियों को अपनाने का मौका देना है। इसके साथ ही, सरकारी विद्यालयों की तरह निजी विद्यालयों में भी कक्षावार बस्तों का निर्धारित वजन लागू किया जाएगा, ताकि बच्चों को अनावश्यक भार न उठाना पड़े।
उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ेंगे छात्र
‘हमारी विरासत एवं विभूतियां’ पुस्तकें निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों को उत्तराखंड की समृद्ध लोक विरासत, सांस्कृतिक विविधता, पृथक राज्य आंदोलन, लोकगीत, लोकनृत्य, ऐतिहासिक स्थल, और महान विभूतियों के बारे में जानकारी प्रदान करेंगी। इसके साथ ही, यह पुस्तके बच्चों को राज्य की सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना से भी अवगत कराएंगी।
निजी और सरकारी विद्यालयों के बीच संसाधनों की साझेदारी
डॉ. रावत ने बताया कि राज्य में निजी और सरकारी विद्यालयों के बीच ‘टीचिंग शेयरिंग प्रोग्राम’ शुरू किया जाएगा, जिससे दोनों प्रकार के विद्यालय आपस में शिक्षण विधियों का आदान-प्रदान कर सकेंगे। इसके अलावा, दोनों विद्यालयों के प्रयोगशाला और खेल मैदानों को साझा किया जाएगा, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
साक्षर उत्तराखंड अभियान और टीबी मुक्त भारत में भागीदारी
शिक्षा मंत्री ने निजी विद्यालयों के शिक्षकों को साक्षर उत्तराखंड अभियान से जुड़ने का आह्वान किया, जिसके तहत प्रत्येक शिक्षक को एक निरक्षर व्यक्ति को साक्षर बनाना होगा। साथ ही, विद्यालय संचालकों को ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान में निःक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों की मदद करने का भी अनुरोध किया गया। इस पहल को निजी विद्यालय संचालकों ने अपनी सहमति प्रदान की है।
