कोलकाता में आयोजित विशेष कार्यक्रम में बोले शिक्षा मंत्री, राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय को किया नमन
कोलकाता/देहरादून, 7 नवम्बर 2025।
राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर प्रदेश के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कोलकाता के सल्ट लेक स्थित पीएम-श्री केन्द्रीय विद्यालय में आयोजित स्मरणोत्सव कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उनके साथ केन्द्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजमुदार भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. रावत ने कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ कोई सामान्य गीत नहीं, बल्कि यह राष्ट्र जागरण का महामंत्र है। जिस पवित्र धरती पर इस अमर गीत की रचना हुई, वहां उपस्थित होना अपने आप में गौरव का क्षण है।
उन्होंने राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय को नमन करते हुए कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ भारतीय संस्कृति, अस्मिता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। यह गीत केवल शब्दों का संकलन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की अनुगूंज है।
डॉ. रावत ने कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ की रचना एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण थी। बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय के कालजयी उपन्यास ‘आनंद मठ’ में यह गीत सर्वप्रथम प्रकाशित हुआ था, जिसने संन्यासी विद्रोह की भावना को जन्म दिया। यही गीत आगे चलकर भारतीय स्वाधीनता संग्राम का प्रेरणास्रोत बना और असंख्य देशभक्तों के हृदय में बलिदान की ज्योति प्रज्वलित की।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूर्ण होने पर देशवासियों के नाम संदेश का लाइव प्रसारण भी देखा गया। तत्पश्चात डॉ. रावत ने केन्द्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. मजमुदार के साथ विद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों से संवाद किया। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, विद्यार्थियों की आकांक्षाओं तथा विद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं की जानकारी ली।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. रावत ने बच्चों से ‘वन्दे मातरम्’ की भावना को सदैव हृदय में जीवित रखने और राष्ट्रसेवा के संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
