विक्टोरिया क्रॉस विजेता शहीद गबर सिंह नेगी को जयंती पर दी गई भावपूर्ण श्रद्धांजलि
सेना अधिकारियों, जवानों और जनप्रतिनिधियों ने शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर किया नमन | वीरता और बलिदान की अमर गाथा बनी प्रेरणा का स्रोत
चंबा, टिहरी।
प्रथम विश्व युद्ध के अमर शहीद और विक्टोरिया क्रॉस विजेता गबर सिंह नेगी की जयंती के अवसर पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सोमवार को आयोजित इस कार्यक्रम में सेना के अधिकारियों, जवानों, पूर्व सैनिकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम की शुरुआत शहीद के परिजनों व ग्रामीणों द्वारा ढोल-दमाऊ की थाप पर शहीद स्मारक स्थल पहुंचकर पूजा-अर्चना से हुई। इसके बाद गढ़वाल राइफल्स के सेंटर कमांडेंट कर्नल विनोद नेगी ने पुष्पचक्र अर्पित किया। लैंसडाउन से आए द्वितीय गढ़वाल राइफल के सैनिकों ने शस्त्र सलामी दी और शहीद की स्मृति को नमन किया।
कर्नल विनोद नेगी ने कहा कि गबर सिंह नेगी की शौर्यगाथा आज भी सैनिकों के हौसले को बुलंद करती है। वह हम सभी के प्रेरणास्त्रोत हैं। उन्होंने घोषणा की कि चंबा मेले में सेना भर्ती का आयोजन किया जाएगा और शहीद स्मारक की देखरेख के लिए चौकीदार की नियुक्ति भी की जाएगी।
इस कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक किशोर उपाध्याय समेत कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। सैनिकों की बैंड प्रस्तुति और पूर्व सैनिकों की परेड ने कार्यक्रम को और भी भव्य बना दिया। कार्यक्रम के बाद एक निजी होटल में आयोजित सम्मान समारोह में वीर नारियों और सेना अधिकारियों को सम्मानित किया गया।
उपस्थित प्रमुख लोग:
संजय रावत (पूर्व सैनिक संगठन अध्यक्ष), देव सिंह पुंडीर (संरक्षक), संजय नेगी (राज्य मंत्री), शोभनी धनोला (नगर पालिका अध्यक्ष), चंद्र बहादुर (जिला सैनिक कल्याण अधिकारी), इंद्र सिंह नेगी, कृष्णा ममगाई, महिपाल सजवाण, शंकर कोठारी, आनंद सिंह नेगी, शूरवीर सिंह, सूबेदार पुष्कर सिंह, तजबीर सिंह, संतोष, महावीर सिंह, शक्ति जोशी, महेश पैन्यूली, गौरव फोंदणी, विक्रम सिंह रावत आदि।
शहीद गबर सिंह नेगी का जीवन परिचय:
शहीद गबर सिंह नेगी का जन्म 20/21 अप्रैल 1895 को उत्तराखंड के टिहरी जनपद स्थित चंबा प्रखंड के मज्यूड़ गांव में हुआ था। उनके पिता बद्री सिंह नेगी एक किसान थे और माता साबित्री देवी गृहणी थीं। अक्टूबर 1913 में वे गढ़वाल रेजीमेंट की 2/39 बटालियन में राइफलमैन के रूप में भर्ती हुए।
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 10 मार्च 1915 को गबर सिंह ने अग्रिम मोर्चे पर नेतृत्व करते हुए अद्वितीय वीरता दिखाई और वीरगति को प्राप्त हुए। इस युद्ध में भारतीय सेना ने 350 से अधिक जर्मन सैनिकों और अधिकारियों को बंदी बनाया। उनके इस अभूतपूर्व शौर्य के लिए उन्हें मरणोपरांत ब्रिटिश सेना का सर्वोच्च सम्मान विक्टोरिया क्रॉस प्रदान किया गया।
