विश्वविद्यालयों में साइबर सुरक्षा होगी और मजबूत, छात्रों का डाटा सुरक्षित रखना सर्वोच्च प्राथमिकता: डॉ. धन सिंह रावत
डीपीडीपी एक्ट के अनुपालन के दिए निर्देश, ‘एक विश्वविद्यालय-एक शोध’ कार्यक्रम राजभवन में होगा आयोजित; छात्रसंघ चुनावों में 50% पद छात्राओं के लिए आरक्षित करने पर सहमति
देहरादून, 08 जून 2026 | SKS News |
उत्तराखंड के राजकीय विश्वविद्यालयों में साइबर सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लिया है। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सभी राजकीय विश्वविद्यालयों को छात्रों एवं संस्थानों के डिजिटल डाटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) एक्ट के प्रभावी अनुपालन के निर्देश दिए हैं।
सोमवार को अपने शासकीय आवास पर आयोजित राज्य विश्वविद्यालयों की समीक्षा बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। उन्होंने विश्वविद्यालयों के वेब एप्लिकेशन, ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल डाटा को साइबर खतरों से सुरक्षित रखने के लिए ठोस एवं प्रभावी सुरक्षा उपाय अपनाने पर विशेष जोर दिया।
डॉ. रावत ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर सुरक्षा और डाटा गोपनीयता एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। ऐसे में विश्वविद्यालयों को अपने डिजिटल सिस्टम को मजबूत बनाते हुए छात्र-छात्राओं की व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखना होगा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा लागू डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) एक्ट के तहत साइबर सुरक्षा, डाटा गोपनीयता और ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिए व्यापक प्रावधान किए गए हैं, जिनका पालन सभी विश्वविद्यालयों को सुनिश्चित करना होगा।
बैठक में विश्वविद्यालयों द्वारा गोद लिए गए गांवों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। इसके साथ ही प्रत्येक विश्वविद्यालय से 20-20 मेधावी छात्र-छात्राओं का चयन कर उन्हें राज्यपाल के हाथों सम्मानित करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि “एक विश्वविद्यालय-एक शोध” योजना के तहत सभी विश्वविद्यालयों को अपने प्रमुख शोध कार्यों पर पांच-पांच मिनट का प्रस्तुतीकरण तैयार करना होगा। इन शोध प्रस्तुतियों का प्रदर्शन राजभवन में कुलाधिपति के समक्ष किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य विश्वविद्यालयों में हो रहे उत्कृष्ट शोध कार्यों को प्रोत्साहित करना और उन्हें व्यापक मंच प्रदान करना है।
बैठक में संस्कृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इसके तहत हरिद्वार में देशभर के संस्कृत विश्वविद्यालयों की एक विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें देववाणी संस्कृत के प्रचार-प्रसार और शोध गतिविधियों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
समीक्षा बैठक में सभी राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने साइबर सुरक्षा, परीक्षा संचालन और विश्वविद्यालयों की भविष्य की चुनौतियों को लेकर अपने-अपने संस्थानों की कार्ययोजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया। साथ ही बदलते तकनीकी परिवेश को देखते हुए नई रणनीति और सुरक्षा ढांचे को अपनाने पर सहमति व्यक्त की गई।
बैठक में आगामी छात्रसंघ चुनावों को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई, जिसमें छात्र नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से छात्रसंघ के 50 प्रतिशत पद छात्राओं के लिए आरक्षित रखने के प्रस्ताव पर सहमति बनी।
बैठक में सचिव उच्च शिक्षा बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, सचिव राज्यपाल रविनाथ रमन, कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डी.एस. रावत, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन.के. जोशी, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.पी.एस. बिष्ट, संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पाण्डेय, तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर, अपर सचिव उच्च शिक्षा मनुज गोयल, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. वी.एन. खाली, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. आशुतोष भट्ट सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
