सफलता की कहानी: न्यूली लिफ्ट सिंचाई योजना से बंजर खेतों में लौटी हरियाली, किसानों के जीवन में आई समृद्धि
₹331.43 लाख की योजना बनी किसानों के लिए वरदान, अब वर्षा पर निर्भरता घटी, नकदी फसलों से बढ़ी आय
कीर्तिनगर, टिहरी गढ़वाल, 29 जुलाई 2026।
“जब खेतों तक पानी पहुँचता है, तब केवल फसलें ही नहीं, बल्कि किसानों की उम्मीदें भी हरी-भरी हो जाती हैं।” यह पंक्ति जनपद टिहरी गढ़वाल के विकासखंड कीर्तिनगर स्थित ग्राम न्यूली और सेमी सेमला के किसानों पर पूरी तरह सटीक बैठती है। वर्षों तक सिंचाई के अभाव में सूखे और बंजर पड़े खेत आज लहलहाती फसलों से भर चुके हैं। इसका श्रेय जाता है न्यूली लिफ्ट सिंचाई योजना को, जिसने क्षेत्र की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है।
पानी की कमी बनी थी सबसे बड़ी चुनौती
एक समय था जब न्यूली और सेमी सेमला के अधिकांश किसान केवल वर्षा आधारित खेती पर निर्भर थे। बारिश समय पर न होने पर खेत खाली रह जाते थे और उत्पादन बेहद कम होता था। सिंचाई के अभाव में बड़ी मात्रा में कृषि भूमि अनुपयोगी पड़ी रहती थी, जिससे खेती घाटे का सौदा बनती जा रही थी।
खेती से पर्याप्त आमदनी न होने के कारण अनेक परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया था। युवाओं का खेती से मोहभंग होने लगा और रोजगार की तलाश में पलायन लगातार बढ़ रहा था।
लिफ्ट सिंचाई योजना ने बदली तस्वीर
इस समस्या के समाधान के लिए सिंचाई विभाग के लघु डाल खंड, उत्तरकाशी द्वारा नाबार्ड (RIDF-28) के अंतर्गत लगभग ₹331.43 लाख की लागत से न्यूली लिफ्ट सिंचाई योजना का निर्माण कराया गया।
इस परियोजना के तहत चन्द्रभागा गाड़ से लगभग 500 मीटर की ऊँचाई तक आधुनिक तकनीक से पानी लिफ्ट कर खेतों तक पहुँचाया जा रहा है। दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में इतनी ऊँचाई तक पानी पहुँचाना तकनीकी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण था, लेकिन योजना के सफल संचालन ने इसे संभव बना दिया।
बंजर खेत बने हरे-भरे
योजना के शुरू होने के बाद वर्षों से खाली पड़े खेतों में फिर से खेती शुरू हो गई। अब किसानों को समय पर सिंचाई उपलब्ध होने लगी है, जिससे कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
किसानों ने पारंपरिक अनाज के साथ-साथ आधुनिक और अधिक लाभ देने वाली फसलों की खेती भी शुरू कर दी है। क्षेत्र में अब विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ, मसाले, औषधीय पौधे और अन्य नकदी फसलें उगाई जा रही हैं, जिनसे किसानों की आमदनी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
खेती बनी रोजगार का मजबूत आधार
सिंचाई सुविधा मिलने से कृषि केवल जीविकोपार्जन का माध्यम नहीं रही, बल्कि आय का सशक्त स्रोत बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि अब खेती लाभदायक साबित हो रही है, जिससे युवा भी दोबारा खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर कृषि आधारित रोजगार के अवसर बढ़ने से पलायन की समस्या में भी कमी आने की उम्मीद दिखाई दे रही है। महिलाओं की कृषि कार्यों में भागीदारी भी पहले की अपेक्षा बढ़ी है।
ग्रामीणों में दिखा नया उत्साह
ग्रामवासियों का कहना है कि यह योजना उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। जिन खेतों में कभी केवल झाड़ियाँ दिखाई देती थीं, वहाँ आज हरी-भरी फसलें लहलहा रही हैं।
किसानों का मानना है कि यदि ऐसी योजनाओं का विस्तार अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में भी किया जाए, तो उत्तराखंड के अनेक गांव आत्मनिर्भर कृषि मॉडल के रूप में विकसित हो सकते हैं।
ग्रामीण विकास की प्रेरक मिसाल
न्यूली लिफ्ट सिंचाई योजना केवल एक सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, कृषि समृद्धि और आत्मनिर्भरता का सफल मॉडल बनकर सामने आई है। यह योजना दर्शाती है कि यदि किसानों को समय पर सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध हो, तो वे अपनी मेहनत से कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी विकास की नई कहानी लिख सकते हैं।
प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में संचालित ऐसी योजनाएँ उत्तराखंड के कृषि विकास को नई गति प्रदान कर रही हैं।
