सरहद का साक्षी,
नई टिहरी: शून्य तबादला नीति पर उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ की जिला अध्यक्ष चंद्रवीर नेगी ने नाराजगी जताई है। कहा कि ये वर्षों से दुर्गम में सेवा दे रहे शिक्षकों के साथ अन्याय है। जहां प्रक्रिया कि फरवरी 2021 से चल रही कार्मिकों की स्थानान्तरण प्रक्रिया चल रही थी। माना जा रहा था कि स्थिति सामान्य होती ही 10 प्रतिशत तबादले होंगे। मगर, अंतिम चरण में सरकार ने तबादला सत्र को शून्य घोषित कर दिया।
जिला अध्यक्ष चंद्रवीर नेगी ने बताया कि पहले तो मात्र 10 प्रतिशत कार्मिक, शिक्षकों के स्थानान्तरण का ही प्राविधान किया गया है उस पर भी पिछले कई स्थानान्तरण सत्र में क्रियान्यवयन नहीं किया गया।
इससे दशकों से दुर्गम अति दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों के साथ नाइंसाफी है । पहले कार्मिकों से आवेदन मांगे गए, कोविड 19 की वर्तमान में यद्यपि जटिल समस्याएं हैं किन्तु सकारात्मक रूप में इनका क्रियान्यवयन सामान्य परिस्थितियां आने पर तो हो सकता था।
दूसरी ओर, अधिनियम के धारा- 27 के नाम पर विगत वर्षों से चल रहे स्थानान्तरण जगजाहिर हैं ।आम कार्मिक ,शिक्षक को स्थानान्तरण अधिनियम के नाम पर भी न्याय नहीं है।
संगठन द्वारा शीर्ष स्तर पर निरन्तर मांग की जाती रही है कि पदोन्नति स्थानान्तरण में काउंसलिंग की अनिवार्यता हो, रिक्त पदों के सापेक्ष स्थानान्तरण,विद्यालयों के वास्तविक परिस्थितिजन्य कोटीकरण, गम्भीर बिमारी के यथोचित प्राविधान, महिला कर्मी को 50 वर्ष एवं पुरुष बर्ग को 52 वर्ष में अनिवार्य स्थानान्तरण से छूट, जनपदीय सेवा काडर की स्थिति में एक निश्चित सेवा अवधि में सम्बन्धित शिक्षकों को अपने गृह जनपद में स्थानान्तरण अवसर प्रदान किया जाना, मैदानी जनपद जहां सम्पूर्ण सुगम होने की स्थिति में प्रथम नियुक्ति /पदोन्नति में दुर्गम की शर्तों का पालन कैसे निर्धारित हो।
महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार या शासन द्वारा कभी गम्भीरता पूर्वक विचार ही नहीं गया । शिक्षक एवं कार्मिकों ने विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितिजन्य राज्य में पारदर्शी एवं निष्पक्ष स्थानान्तरणो हेतु अधिनियम ,एक्ट की भरपूर पैरवी की थी उसके बाद भी आम शिक्षक आज भी स्थानान्तरण से महरुम है। सरकार इस पर पुनर्विचार करें ।
इस अवसर पर अपनी नाराजगी व्यक्त करने जिला मंत्री प्रीतम भरतवाण जिला कोषाध्यक्ष अजय चमोली ब्लॉक संगठन से विजेंद्र पवांर मंत्री रोशनलाल, विक्रम सजवान, भिलंगना से महावीर धनियाल, मनमोहन नौटियाल, सुंदर पवार, बलदीप खेमकरण, आनंद, अजय पाल राणा, विजेंद्र पवार, k k नौटियाल, मनीष राजपूत, दलवीर चौहान, अजयबीर रमोला, ओमप्रकाश डबराल, मनोज थपलियाल, सुरेंद्र नेगी, जगदंबा कंडारी, नरेंद्र पवार, मीना भंडारी, तेजपाल नेगी, रविंद्र खाती, विजयपाल सजवान, मनोज कंडवाल आदि लोगों ने सरकार द्वारा स्थानांतरण सत्र शून्य होने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की
