राजकीय महाविद्यालय चकराता, श्रीदेवसुमन विश्वविद्यालय और देश–विदेश के छह देशों के शोधकर्ताओं की सहभागिता; 100+ शोध प्रस्तुतियाँ और 12 तकनीकी सत्र बने आकर्षण का केंद्र
चकराता/देहरादून।
राजकीय महाविद्यालय चकराता (देहरादून) के गणित विभाग, IQAC तथा श्रीदेवसुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, ऋषिकेश परिसर के गणित विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ई-कॉन्फ्रेंस “Recent Developments in Pure and Applied Mathematics (RDPAM–2025)” अत्यंत गरिमामय और शैक्षणिक माहौल में संपन्न हुई। यह आयोजन उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती के विशेष उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
🔷 वैलेडिक्टरी सेशन में वैश्विक गणितीय विमर्श पर जोर
समापन सत्र के मुख्य अतिथि, उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक एवं सम्मेलन संरक्षक प्रो. विश्वनाथ खली ने गणित के बढ़ते वैश्विक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि—
“गणित अब केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि नीति-निर्माण, तकनीक, डिजिटल गवर्नेंस और वैश्विक चुनौतियों के समाधान का आधार बन चुका है।”
उन्होंने शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए बताया कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन न केवल शोध संस्कृति को समृद्ध करते हैं, बल्कि नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और वैश्विक सहयोग की भावना को भी मजबूत करते हैं।
🔷 सम्मेलन की संयोजक प्रो. अनीता तोमर का स्वागत एवं विस्तृत प्रतिवेदन
समापन सत्र की शुरुआत संयोजक प्रो. अनीता तोमर (विभागाध्यक्ष, गणित, ऋषिकेश परिसर) के स्वागत उद्बोधन से हुई। उन्होंने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य गणित के शुद्ध एवं अनुप्रयुक्त क्षेत्रों में वैश्विक शोध-विकास को साझा करने हेतु एक मंच प्रदान करना था।
दो दिनों के दौरान आयोजित तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों को निम्न क्षेत्रों के नवीन शोध प्रवृत्तियों से अवगत कराया गया—
- Differential Equations
- Dynamical Systems
- Fixed Point Theory
- Fractals
- Nonlinear Analysis
- Mathematical Modelling
- Data Science, AI & Machine Learning
- Computational Mathematics
प्रो. तोमर ने बताया कि 100+ शोध प्रस्तुतियाँ और 12 प्रमुख तकनीकी सत्र, भारत सहित तुर्की, सऊदी अरब, ओमान, अल्जीरिया और दक्षिण अफ्रीका के प्रतिभागियों की सक्रिय उपस्थिति के साथ आयोजित हुए।
उन्होंने कहा—
“यह सम्मेलन सैद्धांतिक गणित और वास्तविक जीवन की समस्याओं के बीच की दूरी कम करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ है।”
🔷 प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के उच्च स्तरीय व्याख्यान
दूसरे दिन के सत्र विविध और उन्नत शोध विषयों पर केंद्रित रहे। प्रमुख वक्ताओं में शामिल रहे—
- प्रो. यू.सी. गैरोला (HNBGU)
- डॉ. आशीष कुमार (ICFAI University)
- डॉ. मनीष जैन (अहीर कॉलेज, रेवाड़ी)
- प्रो. राजेन्द्र कुमार (ओमान)
- प्रो. ए. एच. अंसारी (दक्षिण अफ्रीका)
प्रस्तुत प्रमुख शोध विषय—
- F–contractions में नए शोध प्रश्न
- Dickson codes
- फ्रैक्टल विज़ुअलाइजेशन
- चुम्बकीय क्षेत्र में तरल प्रवाह
- भू–चुंबकीय तूफानों की मॉडलिंग
- वेवलेट अनुप्रयोग
- पेरिस्टाल्टिक वेव फ्लो
- वैदिक खगोल विज्ञान की गणितीय अवधारणाएँ
सत्रों की अध्यक्षता देश के प्रतिष्ठित गणितज्ञों—
प्रो. यमनाम रोहेन, प्रो. जी.वी.आर. बाबू, प्रो. एस.ए. कात्रे, प्रो. राजेश शर्मा, प्रो. राजिंदर शर्मा—ने की।
🔷 समापन समारोह: धन्यवाद, प्रेरणा और भविष्य की दिशा
समापन कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. अभय शिखर पंवार ने किया।
स्थानीय आयोजन सचिव डॉ. सुधीप्त कंदारी ने धन्यवाद प्रस्ताव देते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं, तकनीकी टीम और प्रतिभागियों के सहयोग के लिए आभार जताया।
श्रीदेवसुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन.के. जोशी ने शोधार्थियों को बधाई देते हुए भविष्य में भी ऐसे अंतरराष्ट्रीय शोध आयोजनों को निरंतर बढ़ावा देने की बात कही।
Ex-Dean प्रो. कंचन लता सिन्हा की गरिमामयी उपस्थिति ने भी कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया।
कार्यक्रम में डॉ. शिवांगी उपाध्याय, डॉ. नवीन चंद्र, डॉ. मनीषा पंत, डॉ. विनोद चंद्र, डॉ. विपुल कुमार, सुश्री रश्मि रॉय, सुश्री शिवानी नेगी सहित अन्य प्राध्यापकों की सक्रिय भागीदारी उल्लेखनीय रही।
विद्वानों ने एक स्वर में कहा कि RDPAM–2025 गणित के शुद्ध और अनुप्रयुक्त दोनों क्षेत्रों में नए शोध आयामों को खोलने वाला ऐतिहासिक आयोजन सिद्ध होगा, जो वैश्विक शोध सहयोग और नवाचार की दिशा में एक मील का पत्थर है।
