पूर्णानंद घाट ऋषिकेश में हुआ अंतिम संस्कार, क्षेत्र में छाई शोक की लहर
सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’
जीवन का अंतिम सत्य मृत्यु है, किंतु कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो देह त्यागने के बाद भी अपनी सरलता, सादगी और सेवा भावना से लोगों के हृदय में अमर हो जाते हैं।
ऐसे ही एक जननायक, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रेरणादायी व्यक्तित्व थे स्वर्गीय जय सिंह नेगी जी, जिनका 90 वर्ष की आयु में ब्रह्मलीन हो जाना पूरे क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका अंतिम संस्कार आज पूर्णानंद घाट, ऋषिकेश में संपन्न हुआ।
जनसेवा और समर्पण का प्रेरक जीवन
स्व. नेगी जी का जन्म जून 1936 में हुआ था। उन्होंने 36 वर्षों से अधिक काल तक सरकारी सेवा में रहते हुए समाज विकास, शिक्षा, कृषि और ग्रामीण उत्थान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए।
उन्होंने 1955 में अध्यापक के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की, तत्पश्चात 1956 में लिपिक और 1957 में ग्रामीण स्वास्थ्य कर्मी के रूप में कार्य किया।
बाद में उन्होंने सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) के रूप में चमोली, उत्तरकाशी और टिहरी जनपदों में उत्कृष्ट सेवाएं दीं।
आपने प्रसार प्रशिक्षण केंद्र, अल्मोड़ा से 18 माह का प्रशिक्षण प्राप्त किया और ग्राम विकास अधिकारी (वी.एल.डब्ल्यू.) के रूप में कृषि, बागवानी, वन संरक्षण और जनजागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय योगदान दिया।
सामाजिक जीवन में भी रहे अग्रणी
सेवानिवृत्ति के बाद भी स्व. नेगी जी का सामाजिक योगदान निरंतर जारी रहा।
आप राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से ओतप्रोत रहे और राष्ट्र निर्माण में सदैव समर्पित रहे।
सन 1996 से 20 वर्षों तक आप सरस्वती शिशु मंदिर, चंबा के अध्यक्ष रहे।
साथ ही राजकीय पेंशन संगठन के 15 वर्षों तक जिलाध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के ब्लॉक अध्यक्ष व पंचायत प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने संगठन को मजबूत किया।
सृजनशील, सहृदय और प्रेरणादायी व्यक्तित्व
स्व. जय सिंह नेगी जी एक सृजनशील और साहित्यप्रेमी व्यक्ति थे।
लेखक सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’ बताते हैं कि पिछले वर्ष जब उन्होंने अपनी पुस्तक उन्हें भेंट की, तो नेगी जी ने न केवल उसे गंभीरता से पढ़ा, बल्कि दूरभाष पर सारगर्भित समीक्षा भी साझा की — यह उनकी अद्भुत स्मरणशक्ति और साहित्यिक संवेदनशीलता का प्रमाण था।
आपके तीनों पुत्र आज प्रतिष्ठित पदों पर कार्यरत हैं, जो आपके संस्कार और शिक्षाओं का परिणाम है।
स्व. नेगी जी डिबनू (पांगरखाल) सारजूला, टिहरी गढ़वाल के मूल निवासी थे। टिहरी, चंबा और देहरादून में उनका निवास रहा।
जन-जन के प्रिय, सदैव स्मरणीय
स्व. जय सिंह नेगी जी न केवल अपने परिवार बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा के स्रोत रहे।
आपके गुरु स्व. भैरव दत्त तिवारी जी के साथ आपका आत्मीय संबंध रहा।
समाज सेवा, शिक्षा और संगठनात्मक कार्यों में आपके योगदान को आने वाली पीढ़ियाँ सदैव याद रखेंगी।
🕊️ भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🕊️
आपकी सादगी, सेवा और समर्पण को नमन्।
आपका जाना एक युग का अंत है, किंतु आपकी स्मृतियाँ सदैव प्रेरणा देती रहेंगी।
