राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस 2026: प्रशासनिक आंकड़ों के प्रभावी उपयोग पर दिया गया जोर
टिहरी में मनाया गया 20वां राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस, प्रो. पी.सी. महालनोबिस के योगदान को किया गया नमन
टिहरी गढ़वाल, 29 जून 2026 | SKS News।
जनपद टिहरी गढ़वाल में सोमवार को 20वां राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। जिला अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में महान भारतीय सांख्यिकीविद् प्रो. प्रशांत चन्द्र महालनोबिस की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। इस अवसर पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर देश में आधुनिक सांख्यिकी के विकास में दिए गए उनके अमूल्य योगदान को स्मरण किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपर सांख्यिकीय अधिकारी संदीप कुमार ने प्रो. महालनोबिस के जीवन एवं उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रो. महालनोबिस का जन्म 29 जून 1893 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने भारतीय सांख्यिकीय संस्थान (Indian Statistical Institute – ISI) की स्थापना कर देश में वैज्ञानिक आंकड़ा प्रणाली को नई दिशा प्रदान की। उनके द्वारा प्रतिपादित ‘महालनोबिस दूरी’ (Mahalanobis Distance) आज भी सांख्यिकी, डेटा विश्लेषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा शोध कार्यों में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने वर्ष 2007 से प्रत्येक वर्ष 29 जून को राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया, ताकि नीति निर्माण एवं विकास योजनाओं में सांख्यिकी के महत्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाई जा सके।
‘Unlocking the Potential of Administrative Data’ रही इस वर्ष की थीम
इस वर्ष राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस की थीम “Unlocking the Potential of Administrative Data” (प्रशासनिक आंकड़ों की संभावनाओं को अनलॉक करना) रखी गई। विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में मनोज सिंह, सौरभ नौटियाल, प्रांजल कण्डवाल एवं अनुज सिंह (सहायक सांख्यिकीय अधिकारी) ने प्रशासनिक आंकड़ों के प्रभावी उपयोग, नीति निर्माण, सुशासन तथा विकास योजनाओं की निगरानी में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर अपने विचार साझा किए।
सटीक आंकड़े ही बेहतर शासन की मजबूत नींव
कार्यक्रम के समापन अवसर पर जिला अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी साक्षी शर्मा ने राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस की थीम की विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा कि प्रशासनिक आंकड़े शासन-प्रशासन की योजनाओं, नीतियों एवं निर्णय प्रक्रिया की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि यदि आंकड़े सटीक, विश्वसनीय एवं समय पर उपलब्ध हों, तो सरकारें बेहतर नीति निर्माण, संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित कर सकती हैं।
उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आंकड़ों के वैज्ञानिक संग्रह, गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं डिजिटल उपयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया, जिससे सुशासन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के अवसर पर कार्यालय के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सांख्यिकी के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने तथा प्रशासनिक आंकड़ों के गुणवत्तापूर्ण उपयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
