राजकीय महाविद्यालय मजरा महादेव में ‘विकसित भारत @2047’ कार्यक्रम आयोजित
निबंध, चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने प्रस्तुत की विकसित भारत की परिकल्पना, प्राचार्य डॉ. आर.के. भट्ट ने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का किया आह्वान
मजरा महादेव, पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड उच्च शिक्षा निदेशालय के निर्देशानुसार राजकीय महाविद्यालय, मजरा महादेव में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ‘मेरे सपनों का भारत–विकसित भारत @2047’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारत के विकास की भावी योजनाओं, राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका और विकसित उत्तराखंड की परिकल्पना के प्रति जागरूक करना रहा। इस अवसर पर निबंध, चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका अहम: प्राचार्य
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर.के. भट्ट ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवा देश की शक्ति हैं और भविष्य के निर्माता भी हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे शिक्षा, नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामाजिक उत्तरदायित्व और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना तभी साकार हो सकती है, जब प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए समाज के विकास में सहभागी बने।
प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित निबंध प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने शिक्षा, तकनीकी विकास, आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समानता जैसे विषयों के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण की अपनी सोच प्रस्तुत की।
चित्रकला प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए चित्रों के माध्यम से विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड की परिकल्पना को अभिव्यक्त किया। वहीं, भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी, देश के विकास और सामाजिक दायित्वों से जुड़े विचार प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को केंद्र एवं राज्य सरकार की विकास योजनाओं और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण में अपनी भूमिका पर विचार व्यक्त करने का अवसर मिला।
राष्ट्र निर्माण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार, आत्मनिर्भरता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय कर्तव्यों के प्रति सजगता आवश्यक है।
इस प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियां विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास, तार्किक चिंतन और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने में सहायक होती हैं। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ देश के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में अपनी भूमिका समझने का अवसर प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन के सफल संचालन में सहयोग दिया और विद्यार्थियों को विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
