सात महिलाओं ने 10 लाख रुपये की लागत से शुरू किया बेकरी व्यवसाय, हर माह 50-60 हजार रुपये तक आय; मंडुवा, मशरूम समेत कई स्थानीय उत्पादों की बाजार में मांग
टिहरी गढ़वाल/नई टिहरी, 19 अगस्त 2026। टिहरी जनपद के विकासखंड थौलधार के ग्राम भैंसकोटी की सात महिलाओं ने मेहनत, प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग के बूते स्वरोजगार की नई मिसाल पेश की है। कभी घर-गृहस्थी, पशुपालन और खेती-किसानी तक सीमित रहने वाली राजेश्वरी सकलानी, गीता भट्ट, आशा देवी, रजनी, अनीता, विशिला देवी और शकुन्तला देवी आज बेकरी उद्यम के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ ही क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार एवं आजीविका से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित ग्रामोत्थान परियोजना इन महिलाओं के लिए मजबूत सहारा बनी। परियोजना के सहयोग से महिलाओं ने जनवरी 2026 में बेकरी उद्यम शुरू किया और अब इससे नियमित आय अर्जित कर रही हैं।
10 लाख रुपये की लागत से शुरू हुआ बेकरी उद्यम
भैंसकोटी की ये सात महिलाएं दिव्य ग्राम संगठन से जुड़ी हैं। संगठन के अंतर्गत शिवालय स्वयं सहायता समूह, संतोषी समूह और लक्ष्मी समूह की महिलाओं ने मिलकर बेकरी व्यवसाय की शुरुआत की।
ग्रामोत्थान परियोजना के तहत उद्यम सर्वेक्षण के दौरान दिव्य ग्राम संगठन का चयन किया गया। परियोजना टीम द्वारा भौतिक सत्यापन के बाद संगठन को 6 लाख रुपये की परियोजना सहायता राशि उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा 3 लाख रुपये का बैंक ऋण और 1 लाख रुपये का स्वयं का अंशदान मिलाकर कुल 10 लाख रुपये की लागत से बेकरी उद्यम स्थापित किया गया।
परियोजना से मिली सहायता से महिलाओं ने बेकरी मशीनें और अन्य आवश्यक उपकरण खरीदे तथा उत्पादन शुरू किया।
मंडुवा और मशरूम बिस्किट समेत तैयार हो रहे कई उत्पाद
समूह की सदस्य राजेश्वरी सकलानी बताती हैं कि जनवरी 2026 में बेकरी शुरू होने के बाद महिलाओं ने स्थानीय पसंद और बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए विभिन्न उत्पाद तैयार करना शुरू किया।
बेकरी में मंडुवा बिस्किट, आटा बिस्किट, मशरूम बिस्किट, फैन, बन, ब्रेड और केक सहित कई उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनकी बिक्री थौलधार, कमांद, कांडीखाल और टिहरी के बाजारों में मांग के अनुसार की जा रही है।
स्थानीय उत्पादों को आधुनिक स्वरूप देकर बाजार तक पहुंचाने की यह पहल ग्रामीण संसाधनों को स्थानीय रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
हर माह 50 से 60 हजार रुपये की आय
महिलाओं के अनुसार बेकरी उद्यम से वर्तमान में हर माह करीब 50 से 60 हजार रुपये की आय हो रही है। इसमें लगभग 30 से 40 हजार रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया जा रहा है।
इस आय से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। साथ ही परिवार की जरूरतों को पूरा करने में उनकी भूमिका मजबूत हुई है और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है।
‘घर के काम से उद्यम तक’ पहुंचा महिलाओं का सफर
समूह की महिलाओं का कहना है कि पहले उनका अधिकांश समय घरेलू कार्य, खेती और पशुपालन में बीतता था। ग्रामोत्थान परियोजना से मिले सहयोग ने उन्हें अपनी क्षमता पहचानने और उसे व्यवसाय में बदलने का अवसर दिया।
आज महिलाएं स्वयं बेकरी का संचालन कर रही हैं, बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद तैयार करती हैं, बिक्री और आय का प्रबंधन करती हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास और उद्यमिता की भावना भी मजबूत हुई है।
महिलाओं ने कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं और सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को स्वरोजगार से जुड़ने की नई दिशा मिल रही है।
व्यवसाय को विस्तार देने की तैयारी
राजेश्वरी सकलानी और समूह की अन्य महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जिला प्रशासन तथा ग्रामोत्थान परियोजना की टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं और वित्तीय सहयोग से उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिला है।
महिलाओं का लक्ष्य अब अपने बेकरी व्यवसाय का और विस्तार करना तथा अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं को उद्यम से जोड़ना है।
स्थानीय संसाधनों से स्वरोजगार को बढ़ावा
प्रभारी परियोजना निदेशक, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण ज्योति ने बताया कि ग्रामोत्थान परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं एवं स्वयं सहायता समूहों को स्थानीय संसाधनों और उनकी क्षमता के अनुरूप स्वरोजगार से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि भैंसकोटी की महिलाओं की सफलता यह साबित करती है कि उचित मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और मेहनत के बल पर ग्रामीण महिलाएं सफल उद्यम खड़ा कर सकती हैं। परियोजना के माध्यम से ऐसे अन्य समूहों को भी चिह्नित कर उद्यम स्थापना और आजीविका संवर्धन के लिए आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है।
‘सरकारी योजना + महिलाओं की मेहनत’ की प्रेरक कहानी
भैंसकोटी की महिलाओं की सफलता की यह कहानी केवल एक बेकरी व्यवसाय की कहानी नहीं है, बल्कि सरकारी योजना, सामूहिक प्रयास, स्थानीय संसाधनों और महिलाओं की मेहनत से आत्मनिर्भर गांव की तस्वीर पेश करती है।
गांव की इन सात महिलाओं ने यह दिखाया है कि यदि सही अवसर और सहयोग मिले तो ग्रामीण महिलाएं अपने घर और गांव में रहकर भी सफल उद्यम खड़ा कर सकती हैं और परिवार के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे सकती हैं।
