दूरस्थ गांवों में जाकर किसानों को डेमो, प्रयोगात्मक ज्ञान और सरकारी योजनाओं की जानकारी
चंबा (टिहरी गढ़वाल)। 📌 रिपोर्ट: सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’
विकासखंड चंबा के कृषि प्रसार अधिकारी डी.पी. सेमल्टी उन्नत कृषि, उत्पादकता बढ़ाने की तकनीक, जैविक खाद, बीज चयन, फसल संरक्षण और आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग के बारे में किसानों को वर्षों से प्रशिक्षित कर रहे हैं। सेमल्टी दूरस्थ गांवों में स्वयं पहुंचकर उन्नत कृषि के गुर बताने, डेमो देने और किसानों को सरकारी योजनाओं की व्यवहारिक जानकारी देने के लिए जाने जाते हैं।
गांव-गांव जाकर करते हैं प्रशिक्षण और जागरूकता
कंथर गांव, धारकोट, पुजाल्डी, नागणी से जड़धार तक चंबा ब्लॉक के अनेक गांवों में सेमल्टी लगातार पहुंचकर किसानों को—
- कम क्षेत्रफल में अधिक पैदावार,
- फसलों की सुरक्षा और संरक्षण,
- खरीफ और रबी फसलों की बुवाई, निराई-गुड़ाई और कटाई,
- जैविक खाद, उन्नतशील खाद और बीजों का उपयोग,
- कृषि यंत्रों के प्रयोग और रख-रखाव
जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी और प्रायोगिक प्रशिक्षण देते हैं।
प्रगतिशील किसानों से लेकर सामान्य कृषक तक सभी करते हैं सराहना
सेमल्टी की कार्यशैली किसानों द्वारा लगातार सराही जाती रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के सामान्य कृषक से लेकर प्रगतिशील किसान तक, सभी उनके व्यवहार, ज्ञान और प्रशिक्षण के तरीके की प्रशंसा करते हैं। वे स्थानीय बोली-भाषा में समझाकर किसानों को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने का प्रयास करते रहे हैं।
जमीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन
सेमल्टी द्वारा संचालित गतिविधियों से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी कृषि योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने, लाभार्थियों तक पहुंचाने और उन्हें योजना लाभ, प्रशिक्षण व तकनीकी सहयोग दिलाने में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई है।
सहकर्मियों का सहयोग और तालमेल
कार्यक्रमों के दौरान उनके साथ कार्यरत सहकर्मियों—अंशुमन गुरंग, प्रमोद कुमार, जोशी सहित कार्यालय कर्मियों का भी समर्पण सराहनीय बताया गया। इन सभी की टीमवर्क से किसानों को लाभकारी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलता रहा है।
🛡 Disclaimer:
यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों, कृषकों के अनुभव, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कृषि प्रसार कार्यालय से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। किसी भी कृषि तकनीक, सरकारी योजना या प्रशिक्षण संबंधी जानकारी की आधिकारिक पुष्टि के लिए संबंधित कृषि विभाग, कृषि प्रसार अधिकारी या सरकारी दस्तावेजों को प्राथमिक स्रोत माना जाए। Sarhad Ka Sakshi सामग्री में तथ्यात्मक परिवर्तन नहीं करता।
