चंबा ब्लॉक के नैचोली गांव की सिंचाई गूल वर्षों से बदहाल, लाखों की लागत के बावजूद खेत सूखे, ग्रामीणों की खेती संकट में
टिहरी गढ़वाल, चंबा।
उत्तराखंड के टिहरी जनपद में स्थित विकासखंड चंबा की धार अकरिया पट्टी के नैचोली गांव में कभी हरे-भरे खेतों में लहलहाती धान, गेहूं और नगदी फसलें अब इतिहास बन चुकी हैं। वह भूमि जहां कभी किसान प्याज, आलू, अदरक, हल्दी, लहसुन, चना, मटर, उड़द की बंपर खेती करते थे, आज झाड़ियों और वीरानी से भर गई है।
इस दुर्दशा के पीछे मुख्य वजह है – सिंचाई की गूल में पानी की अनुपलब्धता।
करीब 1.5 किलोमीटर लंबी इस पारंपरिक गूल (सिंचाई नहर) को वर्षों पहले सीमेंट-बजरी से पक्का किया गया था, लेकिन निर्माण में लापरवाही के चलते जगह-जगह दरारें पड़ गईं। पानी की आपूर्ति धीरे-धीरे कम होती गई और अंततः खेतों तक पहुँचना बंद हो गया।
🔧 ग्रामवासियों की कोशिशें और सरकारी उदासीनता:
स्थानीय किसानों ने निजी संसाधनों से गूल की मरम्मत भी कराई, लेकिन समस्या बनी रही। वर्ष 2023 में ग्रामीणों ने लघु सिंचाई विभाग, नई टिहरी को समस्या से अवगत कराते हुए गूल मरम्मत का प्रस्ताव भेजा। विभाग ने 90 मिमी के प्लास्टिक पाइप डलवाए, लेकिन वे भी आधे रास्ते तक ही पहुंचे। छह लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च होने के बावजूद आज तक खेतों में पानी की एक बूंद भी नहीं पहुँची।
📋 तकनीकी स्थिति और विभागीय प्रतिक्रिया:
वर्तमान में लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता भगवान सिंह पंवार ने मौके का सर्वेक्षण किया है। उनके अनुसार, अभी भी 800 मीटर गूल बनाना बाकी है, जिसके लिए 7 लाख रुपये का नया स्टीमेट तैयार किया गया है।
लेकिन विभाग बजट की कमी के कारण कार्य शुरू नहीं कर पा रहा है। जैसे ही धनराशि स्वीकृत होती है, निर्माण कार्य को शुरू करने का आश्वासन दिया गया है।
🧑🌾 जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और अपेक्षाएं:
नैचोली गांव के निवासियों ने हाल ही में गांव में आए क्षेत्रीय विधायक व कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के समक्ष यह मुद्दा उठाया। ग्रामीणों ने मंत्री से तत्काल बजट स्वीकृति की मांग की, ताकि वर्षों से सूखे पड़े खेतों को फिर से जीवन मिल सके।
निवर्तमान क्षेत्र पंचायत सदस्य ज्योति प्रसाद पंत, निवर्तमान प्रधान सुरेंद्र सिंह, दिनेश प्रसाद उनियाल और सुरेंद्र दत्त विजल्वाण ने विभाग से तत्काल कार्यवाही की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो नैचोली गांव की कृषि व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
जहां कभी हरियाली और खुशहाली की तस्वीरें थीं, आज वहां वीरानी पसरी है। नैचोली गांव की सिंचाई गूल एक सरकारी असफलता की प्रतीक बनती जा रही है। अब सवाल यह है कि जब ग्रामीणों ने अपनी ओर से हर प्रयास कर लिए हैं, तो क्या सरकार भी अपनी जिम्मेदारी निभाएगी? क्या नैचोली गांव फिर से हरा-भरा होगा?
उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों की आत्मनिर्भरता की नींव खेती और सिंचाई व्यवस्था पर टिकी है। यदि इन बुनियादी सुविधाओं की ही अनदेखी होती रही, तो पलायन रोकने की कोशिशें भी खोखली ही साबित होंगी।
