टिहरी: भूमि खरीद-फरोख्त से पहले ग्राम प्रधान व सहखातेदारों की सहमति सुनिश्चित करने के निर्देश, जिलाधिकारी कार्यालय का आदेश जारी
अनियमित भूमि खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने की पहल, रजिस्ट्री से पूर्व ग्राम प्रधान एवं सभी सहखातेदारों की जानकारी और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश।
नई टिहरी, 26 जुलाई 2026।
जनपद टिहरी गढ़वाल में भूमि के क्रय-विक्रय में बढ़ती अनियमितताओं और सहखातेदारों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कार्यालय जिलाधिकारी, टिहरी गढ़वाल द्वारा जारी आदेश में समस्त तहसीलदारों एवं उप निबंधकों को निर्देशित किया गया है कि भूमि की रजिस्ट्री से पूर्व ग्राम प्रधान एवं सहखातेदारों की जानकारी, सहमति तथा आवश्यक नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जारी निर्देशों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि एवं गैर-कृषि भूमि के क्रय-विक्रय के मामलों में कई प्रकार की अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई मामलों में सीमित जानकारी रखने वाले ग्रामीणों को गुमराह कर भूमि का विक्रय कराया जा रहा है, जबकि कुछ प्रकरणों में एक सहखातेदार द्वारा अन्य सहखातेदारों की जानकारी एवं सहमति के बिना साझा भूमि का विक्रय कर दिया जाता है। इससे बाद में न्यायालयों में विवाद उत्पन्न होने के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द भी प्रभावित होता है।
जिलाधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान व्यवस्था में रजिस्ट्री के बाद ग्राम पंचायत स्तर पर आपत्तियों एवं जानकारी की प्रक्रिया का कोई व्यावहारिक महत्व नहीं रह जाता, क्योंकि तब तक स्वामित्व का हस्तांतरण हो चुका होता है। ऐसे में कमजोर एवं कम जानकारी रखने वाले सहखातेदारों को न्याय पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
आदेश में उत्तराखंड भू-राजस्व अधिनियम, 1956, भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति के वैधानिक अधिकारों का हनन न हो तथा भूमि संबंधी स्वामित्व का हस्तांतरण पारदर्शी, विधिसम्मत एवं विवादरहित तरीके से सुनिश्चित किया जाए।
जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि किसी भी ग्राम पंचायत में स्थित भूमि की रजिस्ट्री से पूर्व ग्राम प्रधान एवं सहखातेदारों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाए तथा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में भूमि संबंधी विवादों को रोका जा सके और सभी पक्षों के अधिकार सुरक्षित रहें।
