श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952 द्वारा आयोजित रामलीला महोत्सव के तृतीय दिवस पर ‘राज्य आंदोलनकारी सम्मान दिवस’ मनाया गया, सांस्कृतिक धरोहर और डिजिटल लाइव प्रसारण बना आकर्षण।
देहरादून। श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून द्वारा आयोजित भव्य रामलीला महोत्सव 2025 के तृतीय दिवस पर बुधवार को राज्य आंदोलनकारी सम्मान दिवस मनाया गया। यह आयोजन देहरादून के श्री गुरु नानक मैदान रेसकोर्स में हो रहा है, जिसमें उत्तराखंड आंदोलनकारियों के योगदान का स्मरण करते हुए शहीदों को नमन किया गया।
समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि टिहरी गढ़वाल उत्तराखंड आंदोलन का प्रमुख केंद्र रहा है। 1994 के आंदोलन में सभी वर्गों और व्यापारियों ने सक्रिय सहयोग दिया था। राज्य आंदोलन के शहीदों की स्मृति को समर्पित कर रामलीला मंचन ने एक भावनात्मक संदेश दिया।
रामलीला मंचन के आकर्षण
तृतीय दिवस में सीता–स्वयंवर, धनुष भंग और परशुराम–लक्ष्मण संवाद का अद्भुत मंचन हुआ। इस अवसर पर राम–सीता विवाह के दौरान मंच और दर्शकों पर पुष्पवर्षा विशेष आकर्षण रहा। हास्य अभिनय से वातावरण को रोचक बनाया गया, वहीं परशुराम–लक्ष्मण संवाद में पौराणिक चौपाइयों और गीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
Laser & Sound Show के साथ आरती की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की।
गणमान्य अतिथि और आयोजन की विशेषताएँ
कार्यक्रम में मेयर सौरभ थपलियाल, राज्य आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती, महामंत्री रामलाल खंडूरी, अमित ओबेरॉय, समिति सदस्य अमित पंत, गिरीश पैन्यूली, दुर्गा भट्ट, अजय पैन्यूली, डॉ. नितिन डंगवाल, नीता बहुगुणा, शशि पैन्यूली सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
समिति ने बताया कि पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला, टिहरी के जलमग्न होने के बाद अब देहरादून में भव्य स्वरूप में पुनर्जीवित की जा रही है। 2024 की रामलीला को 55 लाख से अधिक दर्शकों ने विभिन्न माध्यमों से देखा था।
इस वर्ष विशेष आकर्षण के रूप में पहली बार Laser और Sound Show तथा Digital Live Telecast System का आयोजन किया जा रहा है। उम्मीद है कि इसे 75 लाख से अधिक दर्शक देखेंगे।
रामलीला महोत्सव में उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर का संगम भी होगा, जिसमें प्रदेशभर के कलाकार अपनी कला प्रस्तुत करेंगे। साथ ही भजन संध्या, पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम, भव्य कलश यात्रा और 2 अक्टूबर को रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतला दहन का आयोजन भी किया जाएगा।
