केदार शाखा केदारनगर देहरादून
आरएसएस शाखाओं के माध्यम से युवाओं में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सामाजिक समरसता का हो रहा विकास
देहरादून, 27 मई 2026, SKS News।
उत्तराखण्ड ब्यूरो, रिपोर्ट – डॉ. शोभा राम उनियाल
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शाखाएं समाज और चरित्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। प्रतिदिन अथवा साप्ताहिक रूप से आयोजित होने वाली शाखाओं के माध्यम से स्वयंसेवकों में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, सामाजिक समरसता एवं नैतिक मूल्यों का विकास किया जाता है।
आरएसएस की शाखा एक घंटे का ऐसा मिलन केंद्र है, जहां व्यक्ति का सामाजिक, मानसिक, बौद्धिक एवं शारीरिक विकास सुनिश्चित किया जाता है। समय एवं आयु वर्ग के अनुसार संघ द्वारा दैनिक शाखा, साप्ताहिक मिलन, मासिक मंडली, बाल शाखा, प्रौढ़ शाखा और ई-शाखा जैसी गतिविधियों का संचालन किया जाता है। इसके अतिरिक्त धर्म जागरण समन्वय के माध्यम से साप्ताहिक सत्संग भी आयोजित किए जाते हैं, जिनसे लोग संघ की विचारधारा और गतिविधियों से जुड़ सकते हैं।
वर्तमान समय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाएं भारत ही नहीं बल्कि 39 से अधिक देशों में “हिन्दू स्वयंसेवक संघ (HSS)” के नाम से संचालित हो रही हैं। शाखाओं में प्रतिदिन सूर्य नमस्कार, योग, खेल, दंड, नियुद्ध, समूह गीत एवं बौद्धिक चर्चा जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनके माध्यम से स्वयंसेवकों में शारीरिक क्षमता, मानसिक मजबूती और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित की जाती है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 27 सितम्बर 1925 को विजयदशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा नागपुर, महाराष्ट्र में की गई थी। संघ का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित कर राष्ट्रभक्ति एवं चरित्र निर्माण की भावना को मजबूत करना था।
संघ की विचारधारा के अनुसार भारत में रहने वाले सभी हिंदुओं को जाति, भाषा और क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठाकर एक सूत्र में बांधना, सामाजिक समरसता स्थापित करना, सेवा कार्यों को बढ़ावा देना तथा युवाओं में शारीरिक एवं मानसिक सशक्तिकरण विकसित करना प्रमुख उद्देश्य हैं।
दैनिक शाखा में कार्यक्रमों का संचालन निर्धारित क्रम में किया जाता है। शाखा का प्रारंभ ध्वजारोहण एवं ध्वज प्रणाम के साथ होता है। इसके बाद शारीरिक व्यायाम, योग, खेलकूद, समूह गीत, बौद्धिक चर्चा और अंत में प्रार्थना एवं ध्वज प्रणाम के साथ शाखा का समापन किया जाता है।
आरएसएस की शाखाओं में अनुशासन का विशेष महत्व माना जाता है। यहां स्वयंसेवकों को जाति, ऊंच-नीच एवं भेदभाव से ऊपर उठकर समान भाव से कार्य करने की प्रेरणा दी जाती है। शाखाएं केवल एक संगठनात्मक बैठक नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र को जोड़ने वाली एक सशक्त व्यवस्था के रूप में कार्य करती हैं।
