तीनो चरणो में डा० गायत्री को 99 पर्सेंटाइल अंक प्राप्त हुए, उसके बाद 22 अमेरिकन यूनिवर्सिटीस ने उसे आमंत्रित किया । डा० गायत्री ने हेकनसेक यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर, न्यूजर्सी को चुना । वर्तमान में वह जॉन होफकिंन यूनिवर्सिटी में रिसर्च असोसिएट के पद पर कार्यरत है । डा० गायत्री ने प्रारम्भिक शिक्षा RN एकेडमी तथा सेंट मेरी स्कूल विकास नगर, हाई स्कूल वेलहम गर्ल्ज़ देहरादून तथा इंटर DPS आर॰के॰ पुरम नई दिल्ली से किया, M.B.B.S. की पढ़ाईं AIIMS (नई दिल्ली ) से की। इसके बाद अमेरिका के मेसाचूसेट स्टेट यूनिवर्सिटी, बोस्टन से MBA (मेडिकल प्रबंधन)में पोस्ट ग्रैजूएशन किया । उसने M.B.B.S. के तृतीय वर्ष में ही स्वाइन फ़्लू पर रिसर्च पेपर तैयार कर टरॉंटो,कनाडा में अंतर राष्ट्रीय कोनफ़्रेस में प्रस्तुत किया जो अमेरिका में जर्नल ओफ प्रिवेंटिव मेडिसन में प्रकाशित हुआ । सन 2010 में सबसे कम उम्र में रिसर्च प्रकाशित होने पर इंडिया बुक ओफ रिकार्ड में नाम दर्ज हुआ। उत्तराखंड से वह पहली लड़की है जिसे अमेरिका में मेडिकल क्षेत्र में इस प्रकार की बड़ी कामयाबी मिली हो ! डा० गायत्री अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता डा० साधना चौहान ( स्त्री रोग विशेषयज्ञ ) तथा पिता डा० वीरेंद्र सिंह चौहान (सर्जन) जिनका विकास नगर, उत्तराखंड में डा०चौहान अस्पताल के नाम से अपना क्लीनिक तथा नर्सिंग होम है तथा गुरुजनो को श्रेय देती है ! डा० गायत्री के दादा स्व० नेता वतन सिंह जी इस क्षेत्र के जाने माने राष्ट्रीय स्तर के समाजसेवी रहे ! डा० गायत्री का कहना है की लक्ष्य निर्धारित कर लो तो लग्न और कठोर परिश्रम से सफलता हासिल की जा सकती है ! डा० गायत्री का छोटा भाई डा० अनुपम सिंह चौहान AIIMS ( जोधपुर ) में MS कर रहा है तथा डा० गायत्री के पिता डा०वीरेंद्र सिंह चौहान का नाम भी 2009 में इंडिया/ एशिया बुक ओफ रिकार्ड में नाम दर्ज है !

