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ऋषिकेश पंडित ललित मोहन शर्मा श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर ऋषिकेश मैं नमामि गंगे प्रकोष्ठ एवं राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई एवं राष्ट्रीय स्वच्छता गंगा मिशन जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त तत्वाधान से विश्व योग दिवस पर गंगा किनारे त्रिवेणी घाट पर सामान्य योग प्रशिक्षण एवं स्वच्छता विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों द्वारा चार धाम यात्रा में आए तीर्थ यात्रियों को योग के द्वारा स्वास्थ्य रहने का संदेश दिया।
इस कार्यक्रम में श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी. पी. ध्यानीने अपने संदेश में कहा योग न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बल्कि मानसिक सेहत के लिए भी अच्छा होता है, योग का नियमित अभ्यास शरीर रोगमुक्त बनाता है। स्ट्रेस व तनाव भी दूर होता है. रक्त संचार और पाचन बेहतर होता है, हांलाकि, योग करते समय योगाभ्यास से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी है, परिसर के प्राचार्य प्रो गुलशन कुमार ढींगरा ने योग के महत्व को बताने के लिए और लोगों में इसके प्रति जागरूकता फैलाने के लिए हर साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है. योग हमें ‘एकता में बांधने का संदेश देता है।
उन्होंने लोगों को इंस्टेंट फूड से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा कि ऐसी वस्तुएं शरीर के लिए हानिकारक साबित होती हैं। हमारे पूर्वजों ने हमें अच्छी खाद्य पद्धतियां दीं हैं। उसको अपने जीवन में हमें अपनाना चाहिए नमामि गंगे प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ अशोक कुमार मेंदोला ने अपने संबोधन में कहा इस इस वर्ष 2022 में मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम “योग फॉर ह्यूमैनिटी” है. “मानवता के लिए योग”, इस थीम पर ही दुनियाभर में योग दिवस मनाया जाएगा, गौरतलब है कि भारत को योग गुरु कहा जाता है, योग हमारी संस्कृति और जड़ों से जुड़ा हुआ है, इसलिए स्वस्थ और खुशहाल बनने के लिए योग काफी असरदार होता है। भारत के साथ आज पूरी दुनिया योग की ताकत को मानती है छात्र-छात्राओं द्वारा योगाभ्यास के बाद त्रिवेणी घाट पर गंगा स्वच्छता अभियान चलाया गया I जिसमें स्वयंसेवीयो के अलावा के अलावा तीर्थ यात्रा पर आए तीर्थयात्रियों ने भी गंगा स्वच्छता अभियान में प्रतिभाग किया और गंगा में कूड़ा ना डालने की शपथ ली, उन्होंने कहा हम अपने पर्यावरण को स्वच्छ रखेंगे ना खुद गंदगी करेंगे ना दूसरों को करने देंगे I
“खबर वही होती है जिसे दबाने की कोशिश की जाती है, बाकी सब विज्ञापन है। मकसद स्पष्ट होना चाहिए। असल मायने यह है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं। मैं न केवल कलमकार हूँ, बल्कि खबरों के छपने की नींव भी हूँ। इस व्यवस्था का हिस्सेदार हूँ, और इसे बदलने का इच्छुक भी। भावनाओं के साथ बुद्धि का संतुलन रखता हूँ, सच्चाई का साथ और झूठ का विरोध करता हूँ।“