🟥 अंकिता हत्याकांड ब्रेकिंग:
3 साल की सुनवाई के बाद मिला न्याय, तीनों आरोपी दोषी करार
📍 स्थान: कोटद्वार | 🗓️ दिनांक: 30 मई, 2025
✍️ रिपोर्ट: सरहद का साक्षी, डिजिटल मीडिया
भले ही विपक्ष सरकार पर लगातार सवाल उठाता रहा हो, लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली उत्तराखंड सरकार की संवेदनशीलता, सख्ती और पारदर्शिता के चलते आज बेटी अंकिता भंडारी को आखिरकार न्याय मिल गया। तीन साल की लंबी कानूनी प्रक्रिया, SIT की गहन जांच और मजबूत पैरवी के बाद कोटद्वार की अदालत ने इस बहुचर्चित हत्याकांड में तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया है।
💠 सरकार की सख्त कार्यवाही से मिली न्याय की दिशा
घटना के तुरंत बाद ही धामी सरकार ने कठोर रुख अपनाते हुए महज 24 घंटे के भीतर आरोपियों को जेल भेज दिया था। इस संवेदनशील मामले में किसी प्रकार की ढील न देते हुए सरकार ने जांच के लिए DIG पी. रेणुका देवी के नेतृत्व में SIT का गठन किया।
- तीनों आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया गया।
- 500 पन्नों की चार्जशीट तैयार कर कोर्ट में पेश की गई जिसमें 100 से अधिक गवाहों के बयान शामिल किए गए।
- सरकार द्वारा पीड़ित परिवार को ₹25 लाख की आर्थिक सहायता दी गई।
- परिजनों की मांग पर तीन बार सरकारी वकील बदले गए ताकि न्याय की प्रक्रिया में कोई कमी न रह जाए।
- दिवंगत अंकिता के पिता और भाई को सरकारी नौकरी प्रदान की गई।
⚖️ कोर्ट में हर बार खारिज हुई जमानत याचिकाएं
अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अवनीश नेगी द्वारा की गई सख्त पैरवी के चलते आरोपियों की हर जमानत याचिका अदालत ने खारिज की। कोर्ट ने इस बात को गंभीरता से लिया कि यह सिर्फ हत्या का मामला नहीं बल्कि समाज की एक बेटी के सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।
🧕 अंकिता के माता-पिता की भावुक प्रतिक्रिया
फैसले वाले दिन अंकिता के माता-पिता कोटद्वार अदालत परिसर में मौजूद रहे। उनके चेहरे पर गम और उम्मीद दोनों साफ झलक रहे थे।
अंकिता के पिता ने कहा,
“उन्होंने मेरी बेटी को मारा है, मैं चाहता हूं कि उन्हें मौत की सजा मिले। लेकिन आज मुझे सुकून है कि हमारी बेटी को इंसाफ मिला है। राज्य की जनता और सरकार का धन्यवाद करता हूं जो इस लड़ाई में हमारे साथ खड़े रहे।”
अंकिता की मां ने कोर्ट पर भरोसा जताते हुए कहा,
“हमारे विश्वास की जीत हुई है। हमारी बेटी की आत्मा को अब शांति मिलेगी।”
📚 क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?
- अंकिता भंडारी, पौड़ी के यमकेश्वर ब्लॉक स्थित वनतारा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के पद पर कार्यरत थीं।
- 18 सितंबर 2022 को वह रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गईं।
- 24 सितंबर को चीला पावर हाउस नहर से SDRF ने उनका शव बरामद किया।
- पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य (मुख्य आरोपी), उसके सहयोगी सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता ने अंकिता की हत्या की थी और शव को नहर में फेंक दिया था।
🔍 SIT की जांच और कानूनी कार्यवाही
- DIG रेणुका देवी के नेतृत्व में गठित SIT ने मामले की तेजी से जांच की।
- अभियोजन पक्ष ने 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 97 गवाह शामिल थे, जिनमें से 47 प्रमुख गवाहों की गवाही अदालत में हुई।
- 30 जनवरी 2023 से कोटद्वार की एडीजे अदालत में सुनवाई शुरू हुई और लगभग तीन वर्षों तक चली कार्यवाही के बाद 30 मई 2025 को अदालत ने सभी तीनों आरोपियों को दोषी करार दे दिया।
🗣️ राजनीतिक बयानबाजी और असलियत
इस पूरे मामले में कुछ राजनीतिक दलों द्वारा बार-बार VIP कनेक्शन और कथित साजिश की बातें उठाई जाती रहीं, लेकिन कोर्ट में इन आरोपों का कोई प्रमाण नहीं मिला।
सरकार ने ऐसे बयानों को “जनता को गुमराह करने की कोशिश” बताया। खासतौर पर कांग्रेस और आशुतोष नेगी जैसे कुछ लोगों पर निशाना साधा गया जिन्होंने कोर्ट में तो कोई तथ्य नहीं रखे लेकिन सोशल मीडिया और मीडिया में गलत बयानों से भ्रम फैलाने की कोशिश की।
📌 अब अगला कदम – सजा का एलान
कोर्ट द्वारा तीनों आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद अब अगला चरण सजा की घोषणा का है। पीड़ित परिजन और जनता की मांग है कि तीनों को फांसी की सजा दी जाए ताकि यह फैसला एक मिसाल बने।
✍️ निष्कर्ष
अंकिता भंडारी को मिला यह न्याय केवल एक बेटी के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सबक है कि जब सरकार, प्रशासन और जनता एकजुट हों, तो सबसे कठिन से कठिन केस में भी इंसाफ संभव है।
धामी सरकार की संवेदनशीलता, SIT की गहन जांच, और अदालत की सटीक सुनवाई ने इस केस को “न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम” बना दिया है।
