टिहरी हेरिटेज सीरीज़ #5
श्रीकोटेश्वर महादेव : टिहरी गढ़वाल का प्राचीन सिद्धपीठ
टिहरी गढ़वाल, 07 सितंबर 2025।
उत्तराखंड के टिहरी जनपद अंतर्गत नरेंद्रनगर ब्लॉक की पट्टी क्वीली में स्थित श्रीकोटेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव का अत्यंत प्राचीन और दिव्य सिद्धपीठ है। स्कंद महापुराण के केदारखंड (अध्याय 144) में वर्णित यह धाम अनादिकाल से श्रद्धालुओं की आस्था और साधना का प्रमुख केंद्र रहा है।
📖 धार्मिक महत्व
मान्यता है कि यहाँ के पवित्र शिवकुंड में स्नान करने के बाद जब भक्त गर्भगृह में प्रवेश कर शिवलिंग का दर्शन करते हैं, तो उन्हें भगवान शंकर की दिव्य कृपा प्राप्त होती है। यहाँ का शिवलिंग अद्वितीय है क्योंकि इसे सबसे बड़ा शिवलिंग माना जाता है और इस पर भगवान शिव अपने पूरे परिवार सहित विराजमान हैं।
भक्त विश्वास रखते हैं कि यहाँ सच्चे और पवित्र मन से की गई मनोकामनाएँ अवश्य पूर्ण होती हैं।
🕉️ प्राचीन कथा
किंवदंती के अनुसार, ब्रह्मा जी ने यहीं तप किया था, जिसके परिणामस्वरूप करोड़ों ब्रह्मराक्षसों का उद्धार हुआ। तभी से यह धाम और अधिक पुण्यशाली एवं सिद्ध माना जाने लगा।
🌿 आध्यात्मिक अनुभव
कोटेश्वर धाम साधकों के लिए कैलाश समान पवित्र स्थान है। यहाँ उत्तरवाहिनी गंगा की कलकल ध्वनि मानो स्वयं शिव स्तुति करती है। चारों ओर पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा वातावरण प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है।
त्रिलोकनाथ शिव और प्राकृतिक रूपी माँ जगदंबा की संयुक्त ऊर्जा यहाँ साधकों को आत्मिक शांति, मानसिक स्थिरता और अध्यात्मिक उत्थान का अद्भुत अनुभव कराती है।
🙏 आस्था का केंद्र
जो भी श्रद्धालु यहाँ आकर भगवान कोटेश्वर महादेव की उपासना करता है, उसकी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
इसी कारण यह धाम न केवल टिहरी गढ़वाल बल्कि सम्पूर्ण उत्तराखंड और भारतवर्ष के भक्तों के लिए विशेष आस्था का प्रतीक है।
