कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव थापर
🟠 डिप्टी कमांडेंट का निलंबन घोटाले की स्वीकारोक्ति, एफआईआर व स्वतंत्र जांच की मांग
📰 देहरादून | 25 जनवरी 2026
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता अभिनव थापर ने होमगार्ड वर्दी प्रकरण को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रक्रियाओं, सेवा नियमों और आपराधिक कानूनों के खुले उल्लंघन का गंभीर उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि डिप्टी कमांडेंट का निलंबन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि मुख्यमंत्री स्वयं इस घोटाले की गंभीरता को स्वीकार कर चुके हैं, लेकिन सरकार ने जानबूझकर पूरे प्रकरण को केवल निलंबन तक सीमित कर दिया।
⚖️ निलंबन नहीं, एफआईआर और आपराधिक जांच जरूरी
अभिनव थापर ने कहा कि होमगार्ड वर्दी प्रकरण में केवल एक अधिकारी का निलंबन कानूनी खानापूर्ति है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में—
- सरकारी खरीद नियम (Procurement Rules)
- उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली, 2017
- वित्तीय उत्तरदायित्व अधिनियम
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act)
की कई धाराओं के उल्लंघन की स्पष्ट संभावना बनती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में निलंबन नहीं, बल्कि एफआईआर दर्ज होना, संपत्तियों की जांच और स्वतंत्र एजेंसी से आपराधिक जांच अनिवार्य है।
🧾 एक अधिकारी नहीं, पूरी फाइल चेन जिम्मेदार
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने पूरे मामले को जानबूझकर एक अधिकारी तक सीमित कर दिया, जबकि—
- टेंडर समिति
- लेखा अधिकारी
- वित्तीय स्वीकृति देने वाले अधिकारी
- विभागीय सचिव
सभी कानूनी रूप से जवाबदेह हैं।
उन्होंने कहा,
“एक व्यक्ति को निलंबित कर देना पूरे घोटाले को ढकने का क्लासिक प्रशासनिक हथकंडा है।”
💰 वर्दी की दरें खुद हैं आपराधिक साक्ष्य
अभिनव थापर ने कहा कि होमगार्ड वर्दी प्रकरण में सामने आई दरें स्वयं में आपराधिक साक्ष्य (Criminal Evidence) हैं—
- ₹130 का डंडा → ₹375 में खरीदा गया
- ₹500 के जूते → ₹1500 में
- ₹1200 की पैंट-शर्ट → ₹3000 में
- ₹500 की जैकेट → ₹1580 में
उन्होंने कहा कि यह महज महंगाई नहीं, बल्कि जानबूझकर सरकारी धन की लूट और आपराधिक साजिश का स्पष्ट संकेत है।
🚨 IPC की गंभीर धाराएं लागू होने की मांग
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह मामला—
- IPC की धारा 409 (आपराधिक न्यासभंग)
- धारा 420 (धोखाधड़ी)
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम
के अंतर्गत आता है और इसमें कड़ी आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए।
❓ सरकार से चार सीधे सवाल
अभिनव थापर ने कहा कि सरकार ने आज तक यह स्पष्ट नहीं किया कि—
- सप्लायर कौन था?
- टेंडर किस आधार पर दिया गया?
- रेट अप्रूवल किसने किया?
- भुगतान किस अधिकारी के आदेश से हुआ?
उन्होंने कहा कि जब तक ये तथ्य सार्वजनिक नहीं होते, यह साफ है कि सरकार पारदर्शिता नहीं, बल्कि संगठित संरक्षण नीति पर काम कर रही है।
🔥 राज्य प्रायोजित प्रशासनिक लूट का आरोप
अंत में अभिनव थापर ने कहा कि यदि भाजपा सरकार वास्तव में ईमानदार होती तो—
- निलंबन नहीं, एफआईआर दर्ज होती
- विभागीय नहीं, न्यायिक जांच होती
- छोटे अधिकारी नहीं, पूरी फाइल चेन कटघरे में होती
लेकिन वर्तमान स्थिति में एक अधिकारी को बलि का बकरा बनाकर पूरा सिस्टम खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने इसे “State Sponsored Loot” करार दिया।
