विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर चंबा में वृक्षारोपण एवं जागरूकता अभियान आयोजित
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और वन विभाग ने ‘एक वृक्ष मां के नाम’ अभियान के तहत किया पौधरोपण, प्रकृति संरक्षण का लिया संकल्प
चंबा/टिहरी गढ़वाल, 28 जुलाई 2026 | सरहद का साक्षी, डिजिटल मीडिया
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के अवसर पर जनपद टिहरी गढ़वाल के चंबा क्षेत्र में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, टिहरी गढ़वाल एवं वन विभाग (सकलाना रेंज) के संयुक्त तत्वावधान में वृक्षारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान खाली एवं अनुपयोगी भूमि पर निरर्थक झाड़ियों को हटाकर छायादार, फलदार एवं शोभादार पौधों का रोपण किया गया तथा पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया गया।
‘एक वृक्ष मां के नाम’ अभियान के तहत किया पौधरोपण
कार्यक्रम में वन क्षेत्राधिकारी एम.एस. रावत के नेतृत्व में वन विभाग की टीम तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पराविधिक स्वयंसेवियों (PLVs) ने पौधरोपण किया। इस अवसर पर ‘एक वृक्ष मां के नाम’ अभियान के तहत प्रत्येक प्रतिभागी ने पौधे लगाकर उनके संरक्षण का संकल्प भी लिया।
वनों का संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी: एम.एस. रावत
वन क्षेत्राधिकारी एम.एस. रावत ने कहा कि वन मानव जीवन के लिए अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि वन हमें शुद्ध वायु, जल, मिट्टी, ईंधन और जैव विविधता प्रदान करते हैं। पशु-पक्षियों, कीट-पतंगों और मानव जीवन का अस्तित्व वनों पर ही निर्भर है।
उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण करना भी प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने विशेष रूप से वनाग्नि की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हर वर्ष आग से बड़ी मात्रा में वन संपदा नष्ट होती है, जिसे रोकने के लिए जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है।
हरेला पर्व प्रकृति संरक्षण का सशक्त संदेश देता है: सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’
कार्यक्रम में जनकवि एवं साहित्यकार सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’ ने कहा कि उत्तराखंड का हरेला महोत्सव प्रकृति संरक्षण की समृद्ध परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण, पारिस्थितिकी तंत्र, स्वच्छ वायु, जल और हिमालय के संरक्षण के लिए वृक्षारोपण सबसे प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने कहा कि प्रकृति को सबसे अधिक नुकसान स्वयं मानव द्वारा पहुंचाया जाता है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित होना समय की आवश्यकता है।
इस अवसर पर उन्होंने अपनी स्वरचित कविता के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए कहा—
“अट्ठाईस जुलाई श्रावण मास है,
प्रकृति संरक्षण दिवस आज है।
वन विभाग, विधिक सेवा का नारा,
हरितिमा से भरे जग सारा।
धरती के उपकार को जानो,
मां के नाम एक वृक्ष लगाओ।
जंगल रहा सदा उपयोगी,
देता हमको जीवन अरु रोटी।”
प्रकृति संरक्षण का लिया संकल्प
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने, उनके संरक्षण तथा पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का संकल्प लिया। इस अवसर पर कुंवर चंद रमोला, आर.एस. नेगी, मुकेश भंडारी, अमिता सैनी, आकृति, ईशा, ओम प्रकाश तिवारी सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के उपरांत वन क्षेत्राधिकारी एम.एस. रावत निरीक्षण कार्य हेतु रानीचौरी क्षेत्र के लिए रवाना हुए।
