बुधवारी अष्टमी सूर्यग्रहण तुल्य मानी गई, मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर कालभैरव जयंती का पर्व — भगवान भैरव की कृपा से मिलता है निर्भय जीवन और सभी कष्टों से मुक्ति
🪔 बुधवारी अष्टमी का महत्व
प्रस्तुतिः ज्योतिषाचार्य श्री हर्षमणी बहुगुणा
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि सोमवती अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी और बुधवारी अष्टमी — ये चार तिथियाँ सूर्यग्रहण के समान पुण्यदायिनी मानी जाती हैं।
इन विशेष तिथियों पर किया गया मंत्र-जप, ध्यान, स्नान, दान और श्राद्ध अक्षय फलदायी होता है।
बुधवारी अष्टमी विशेष रूप से शुभ संकल्प लेने, नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति पाने और धर्म-साधना की सिद्धि हेतु अत्यंत शुभ मानी जाती है।
🕉️ कालभैरव अष्टमी — भगवान शिव का उग्र और रक्षक रूप
धर्मशास्त्रों के अनुसार, मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालभैरव अष्टमी कहा जाता है।
मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने कालभैरव रूप में अवतार लेकर अधर्म के विनाश और भय से मुक्ति का संदेश दिया।
इसी कारण इस तिथि को कालभैरव जयंती के रूप में मनाया जाता है।
भगवान कालभैरव को “तंत्र के देवता” कहा गया है। तंत्रशास्त्र में माना गया है कि किसी भी सिद्धि या साधना की सफलता के लिए भैरव की पूजा आवश्यक है।
इनके 52 स्वरूप माने जाते हैं, और इनकी कृपा से भक्त निर्भय, समृद्ध और कष्टमुक्त हो जाता है।
🔱 कालभैरव अष्टमी पर 13 शुभ उपाय —
ज्योतिषाचार्य श्री हर्षमणि बहुगुणा द्वारा प्रस्तुत
1. मंत्र-जप एवं पूजा विधि
सुबह स्नान के बाद कुश के आसन पर बैठें। भगवान कालभैरव की तस्वीर स्थापित करें और पंचोपचार से पूजा करें।
रुद्राक्ष की माला से नीचे दिए गए मंत्र की कम से कम पाँच माला जपें:
मंत्र: “ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नमः।”
2. एकांत भैरव मंदिर में पूजा
ऐसे भैरव मंदिर जाएँ जहाँ भीड़ कम हो। सिंदूर और तेल से चोला चढ़ाएँ, नारियल, पुए, जलेबी का भोग लगाएँ और प्रसाद बांटें।
3. भैरव मंत्रों का जप (कम से कम 11 माला)
ॐ कालभैरवाय नमः।
ॐ भयहरणं च भैरवः।
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं।
ॐ भ्रां कालभैरवाय फट्।
4. शाम को दीपदान
शाम के समय सरसों के तेल का दीपक लगाकर भगवान कालभैरव से सभी समस्याओं से मुक्ति की प्रार्थना करें।
5. शिवलिंग पर बिल्वपत्र अर्पण
21 बिल्वपत्रों पर चंदन से “ॐ नमः शिवाय” लिखें और शिवलिंग पर चढ़ाएँ। एकमुखी रुद्राक्ष अर्पित करने से मनोकामना पूर्ण होती है।
6. दो रंग वाले कुत्ते को रोटी खिलाएँ
तेल में अंगुली डुबोकर रोटी पर रेखा खींचें और उसे दो रंग वाले कुत्ते को खिलाएँ। यह क्रम रविवार, बुधवार, और गुरुवार को करें।
7. कर्ज मुक्ति के लिए उपाय
सुबह भगवान शिव की पूजा करें, बिल्वपत्र चढ़ाएँ और नीचे दिया मंत्र जपें —
मंत्र: “ॐ ऋणमुक्तेश्वराय नमः।”
8. कुत्तों को उड़द के पकौड़े खिलाना
कालभैरव अष्टमी से एक दिन पहले उड़द के पकौड़े बनाकर रखें। सुबह 6–7 बजे के बीच बिना किसी से बोले कुत्तों को खिला दें।
9. जलेबी और दान का उपाय
सवा किलो जलेबी भैरवनाथ को चढ़ाएँ, पांच नींबू अर्पित करें और किसी गरीब या कोढ़ी को काला कंबल दान करें।
10. गरीब बस्ती में दान
सरसों के तेल में बने पापड़, पकौड़े, पुए गरीबों में बाँटें।
भैरव मंदिर में 33 अगरबत्तियाँ गुलाब, चंदन और गूगल की सुगंध से जलाएँ।
11. पोटली अर्पण
सवा सौ ग्राम काले तिल, काले उड़द, सवा 11 रुपये और सवा मीटर काला कपड़ा पोटली बनाकर भैरव मंदिर में अर्पित करें।
12. इमरती का भोग
सुबह स्नान कर भैरव मंदिर जाएँ, इमरती का भोग लगाएँ और बाद में दान करें।
13. शिव अभिषेक और ध्यान
किसी निकटवर्ती शिव मंदिर में जाकर जलाभिषेक करें, काले तिल अर्पित करें और ॐ नमः शिवाय का जप करें।
🙏 कालभैरव की उपासना का फल
भैरव उपासना से व्यक्ति को साहस, संरक्षण और आत्मबल प्राप्त होता है।
इनकी कृपा से जीवन में अचानक आने वाले संकट, भय और बाधाएँ दूर होती हैं।
भैरव जयंती पर किया गया जप, दान और भक्ति सद्गति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।
सरहद का साक्षी परिवार की ओर से आप सभी को बुधवारी अष्टमी एवं कालभैरव जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।
🌺 जय कालभैरव! 🌺
✍️ केदार सिंह चौहान ‘प्रवर’
सम्पादक – सरहद का साक्षी (Sarhad Ka Sakshi, Digital Media)
